रेवाड़ी। अनाज से लेकर फल और सब्जियों की कीमतों में वृद्धि से लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। रसोई का बजट बढ़ने से महिलाएं परेशान हैं। वहीं बढ़ती कीमतों के कारण आम उपभोक्ताओं को घरेलू खर्चों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
विशेषकर मध्य और मजदूर वर्ग के परिवारों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। बाजार में आटा, दाल, खाद्य तेल, मसाले और अन्य जरूरी सामान के दाम पहले की तुलना में बढ़ गए हैं। वहीं मौसमी फल और सब्जियों की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है।
लोगों का कहना है कि पहले जितनी राशि में सप्ताहभर का राशन और सब्जियां आ जाती थीं, अब उसी सामान के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
नई अनाज मंडी स्थित किराना दुकानदार मोहित ने बताया कि कई उत्पादों के दाम बढ़ने के पीछे परिवहन लागत और कच्चे माल की महंगाई प्रमुख कारण हैं। मौजूदा समय में सरसों का तेल 10 रुपये महंगा हुआ है। चीनी पर तीन रुपये बढ़े हैं, लाल मिर्च 60 रुपये महंगी हुई है, चने की दाल 10 रुपये महंगी हुई है जबकि पीसी हल्दी 40 रुपये महंगी हुई है।
बासमती में 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पहले लोग थोक में दाल, चावल व अन्य सामान खरीद लिया करते थे, लेकिन अब आधे ही सामान की खरीदारी कर रहे हैं। डीजल की कीमतों और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी से भी सामान महंगा हुआ है। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
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बढ़ती कीमतों के कारण बिक्री भी प्रभावित हुई:
सब्जी विक्रेता जतिन गुप्ता का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण बिक्री भी प्रभावित हुई है। फल और सब्जियों के दाम आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। सब्जियों में सबसे ज्यादा उछाल शिमला मिर्च और खीरे में देखने को मिला है, जिनके दाम सीधे दोगुने हो गए हैं। दुकानदार राजेश ने बताया कि शिमला मिर्च 20 रुपये से सीधे 50 रुपये और खीरा 20 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। हरी मिर्च और मटर के दाम 40 से बढ़कर 60 रुपये हो गए हैं। वहीं टिंडा 40 से 50 और आलू भी 15 से बढ़कर 20 रुपये किलो बिक रहा है। आम के दाम 80 से बढ़कर 100 रुपये किलो हो गए हैं। सेब 280 के बजाय 300 रुपये और अनार 230 से बढ़कर 250 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा हैं