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किसान आंदोलन को कोरोना के बहाने खत्म करना चाहती है केंद्र सरकार : अमराराम

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धरना पर बैठे किसान। - फोटो : Rewari
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बावल। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर बुधवार को 129वें दिन किसानों का धरना जारी रहा। बॉर्डर पर रोजा इफ्तार का आज आठवां दिन था। किसानों ने मिलकर रोजा-इफ्तार किया, वहीं नवरात्र और नवमी भी मनाई गई।
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किसानों ने आंदोलन की शक्ति बढ़ाने और मोर्चों को और ज्यादा मजबूत करने के लिए हर स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। बॉर्डर पर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किसानों के बीच समूहों में चर्चाओं का आयोजन किया गया। धरने पर किसान नेता अमराराम, रामकिशन महलावत, राजाराम मील, हिम्मत सिंह गूर्जर, बलवीर छिल्लर, पेमाराम, छगन चौधरी, डॉ. माधव व तारा सिंह सिद्धू ने कहा कि किसी जनतांत्रिक रवैये वाली सरकार के सामने इतना बड़ा और लंबा आंदोलन चलाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जिस जन-विरोधी सरकार से आज हम लड़ रहे हैं, उनके सामने जिंदा रहने के लिये जनता के सामने आंदोलन के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।
उन्होंने कहा कि अमूमन आंदोलन दो तरीके से खत्म होते हैं, मांगे मान लेने पर या आंदोलन को धन-बल और प्रोपेगेंडा से बर्बाद कर दिया जाता है। इस आंदोलन को तोड़ने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन यह आंदोलन उन सब पर भारी पड़ा। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार किसान आंदोलन को कोरोना महामारी के बहाने खत्म करना चाहती है, लेकिन किसान भी कमर कस कर बैठा है। उसने भी सरकार और महामारी दोनों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। रोजा-इफ्तार में मौलाना दिलशाद, अमजद भाई, फजरु भाई, साजिद भाई, अब्दुल भाई, हरफूल सिंह, कालू थोरी, शोपतराम, भागीरथ, प्रहलाद मांडोता, काला सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, जोगेंद्र यादव, पवन दुग्गल, बाबा जैमल सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, पृथ्वी सिंह, जापान सिंह, निशा सिद्धू व विश्वजीत सिंह आदि शामिल हुए।
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