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गांवों के साथ अब शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर जाकर कृषि कानूनों की खामियां गिना रहे किसान

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दिल्ली-जयपुर हाईवे के खेड़ा बॉर्डर पर 87 दिन से कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन से जुड़े लोगों ने अब गांवों के साथ शहरों में भी पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कानूनों से होने वाले नुकसानों से लोगों को अवगत कराना शुरू कर दिया है। शुरुआती समय से ही आंदोलन से जुड़े कामरेड एडवोकेट राजेंद्र सिंह ने मंगलवार को अपनी टीम के साथ शहर के राव तुलाराम पार्क, नेहरू पार्क एवं सुभाष पार्क में पहुंचकर कानूनों को काला बताए हुए किसानों व आम आदमी को होने वाले नुकसानों को गिनवाया। कामरेड ने कहा कि आंदोलन की अभी तक छह मुख्य उपलब्धियां हो चुकी हैं। देश की जनता की समझ में यह बात आ चुकी है कि सरकार केवल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। आंदोलन में सभी धर्मों के नागरिक एक ही लंगर में खाना खाते हुए कंधे से कंधा मिलाकर अटूट भाईचारा के साथ आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं। एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि यह आंदोलन केवल किसानों का आंदोलन नहीं रहा बल्कि मजदूरों, श्रमिकों व बुद्धिजीवियों को अपने साथ समेटते हुए एक जन आंदोलन बन चुका है।
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सरकार कर रही है पूंजीपतियों की चौकीदारी
खेड़ा बॉर्डर पर आंदोलित किसान नेताओं ने सरकार पर पूंजीपतियों की चौकीदारी का भी आरोप लगाया। किसानों ने कहा कि आजादी के बाद जिस भी पार्टी की सरकार बनी है सभी ने किसानों को लूटने का काम किया और किसानों के साथ धोखा किया है। पहले वाली सरकार भी यदि किसानों के प्रति संवेदनशील होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू कर देती। मौजूदा सरकार ने भी किसानों के साथ धोखा करते हुए तीन काले कृषि कानून बनाए हैं जो किसानों के ऊपर कुठाराघात हैं। किसान नेताओं ने कहा कि जो किसान दूरी और आवागमन की असुविधा के कारण दिल्ली के किसान आंदोलन में नहीं पहुंच पा रहे हैं उन किसानों को दिल्ली के किसान आंदोलन से जोड़ने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश के विभिन्न जिलों में किसान पंचायतों का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार की सभा को गोपाल घायल, महेंद्र, ओमस्वामी, प्रताप, काला मंडार, मोहन नेता, मोहन सिंह फौजी, सुखराज सिंह, सतनाम सिंह, कामरेड बलवीर सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, गुरजीत सिंह, बलकरन सिंह, बलदेव सिंह व राजा राम मील सहित अन्य किसान नेताओं ने संबोधित किया।
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