फोटो 4 : विश्व मृदा दिवस के मौके पर कृषि महाविद्यालय के अधिकारी किसानों को मृदा स्वास्थ्य और फस
बावल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय बावल में शुक्रवार को विश्व मृदा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर लगभग 65 किसान और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. नरेश कौशिक, प्रधानाचार्य, कृषि महाविद्यालय, बावल ने किया।
उन्होंने विश्व मृदा दिवस के महत्व और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए मृदा की सेहत बनाए रखने में जैविक कार्बन की भूमिका के बारे में किसानों को विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बावल के सह वैज्ञानिक डॉ. परमोद यादव ने किसानों को बताया कि समुचित खाद्य प्रबंधन किस प्रकार खेती के लिए लाभकारी है।
उन्होंने मृदा और पानी की जांच के महत्व पर जोर देते हुए मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में सूक्ष्म जीवों के योगदान के बारे में विस्तृत व्याख्यान दिया। सहायक वैज्ञानिक डॉ. धर्मप्रकाश तेवतिया ने विभिन्न फसलों के लिए खाद सिफारिशों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने फसलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण और उनके निवारण के उपायों पर भी ध्यान केंद्रित किया। किसानों ने इस व्याख्यान से अपनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कृषि विज्ञान केंद्र, बावल के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. बलबीर सिंह ने किसानों को परंपरागत फसलों को छोड़कर नई फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।
उन्होंने किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों और फसल विविधता अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों और छात्रों में मृदा संरक्षण, पोषण प्रबंधन और कृषि में नई तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य व पोषक तत्वों की संतुलित उपलब्धता ही खेती की सफलता व किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की कुंजी है।
विश्व मृदा दिवस के मौके पर किसानों को न केवल उनकी फसलों की उपज बढ़ाने के तरीके बताए बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की दिशा में भी मार्गदर्शन किया।