रेवाड़ी। वर्ष 2016 में इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी (आईजीयू) मीरपुर को ग्लोबल विश्वविद्यालय बनाने का दावा पूरा होता नहीं दिख रहा है। ग्लोबल तो दूर विवि 2013 के बाद रीजनल सेंटर की छवि से बाहर नहीं निकल पाया है।
विवि में लैब से लेकर छात्रावास, स्टेडियम के निर्माण का दावा सालों से किया जा रहा है, लेकिन आज तक एक ईंट तक नहीं लग पाई है। जो भी वीसी चार्ज संभालते हुए बड़े-बड़े दावे जरूर करते हैं, लेकिन आगे नहीं बढ़ पाते। बता दें कि 2013 में लंबी लड़ाई के बाद एमडीयू के रीजनल सेंटर को आईजीयू बनाने की घोषणा हुई थी। उस समय हुए निर्माण के बाद एक भी निर्माण कार्य नहीं हो सका है। 2016 में वीसी बने प्रो. एसपी बंसल ने विवि को ग्लोबल बनाने का दावा करते हुए कहा था कि सबसे पहले विश्वविद्यालय में छह चेयर बनाई जाएंगी। इसमें छह अलग-अलग महापुरुषों से छात्रों को अवगत कराया जाएगा। इन महापुरुषों में से तीन का संबंध तो रेवाड़ी से हैं। इसके अध्ययन से छात्रों को इन महापुरुषों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे कॉलेज की आय भी बढ़ेगी। कहा गया था कि आईजीयू में शीघ्र ही हेमचंद विक्रमादित्य, राव तुलाराम, बाबू बालमुकंद गुप्त, स्वामी विवेकानंद, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर एवं बाबा मस्तनाथ की चेयर स्थापित होंगी। इन चेयर के स्थापित होने से इन महापुरुषों के व्यक्तित्व से विद्यार्थी अधिक से अधिक रूबरू हो सकेंगे।
विजन डॉक्यूमेंट 2020 के तहत कार्य
दावा किया गया था कि अभी आईजीयू बने चार साल ही बीते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने इसके लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिए हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से विजन डॉक्यूमेंट 2020 के तहत कार्य किए जाएंगे। इसमें विश्वविद्यालय के अचीवमेंट निर्धारित किए जाएंगे। इन्हें टारगेट कर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। विश्वविद्यालय का सर्वाधिक जोर क्वालिटी बेस कोर्सेज पर रहेगा। इसके लिए इसे ई-गवर्नेंस से भी जोड़ा जाएगा। प्रयास किया जाएगा कि यूनिवर्सिटी अपने पैरों पर स्वयं खड़ी हो। इसकी लिए इसे किसी अन्य पर आधारित नहीं रहना पड़े। विश्वविद्यालय में छह चेयर लाना भी इसी कार्यक्रम का हिस्सा है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय में वोकेशनल कोर्सेज भी शुरू किए जाएंगे।
पत्राचार पाठ्यक्रम का दावा भी फेल
वर्ष 2016 में वीसी की ओर से कहा गया था कि विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की ओर से यहां पत्राचार पाठ्यक्रम शुरू करने का भी प्रस्ताव पास किया गया है। इसे सिरे चढ़ाने के लिए सभी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई है। अगले सत्र में इसे शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन आज तक पत्राचार कोर्स शुरू तो दूर दो साल पहले सीटों की संख्या तक कम कर दी गई।
12बी की अड़चनें नहीं हुईं दूर
अभी यूनिवर्सिटी में कही से भी आय नहीं हो रही है। यूसीजी से मिलने वाला फंड भी कई बाधाओं के चलते रुका हुआ है। इससे सबसे बड़ी बाधा 12बी को शीघ्र ही दूर करने की बात कही गई थी, लेकिन इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सका है। बता दें कि इस दर्जे के बाद यूनिवर्सिटी को यूजीसी से मिलने वाला फंड सीधा मिलने लगेगा।