जिले में पहली बार 133 ब्लॉक समिति सदस्य को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन(ईवीएम) से मतदान कर चुना जाएगा, इससे पहले बैलेट पेपर से मतदान होता था। महज 3149 पंचों के लिए पारंपरिक बैलेट पेपर से मतदान किया जाएगा। इसके अलावा 358 पंचायतों व 18 जिला परिषद सदस्यों का चुनाव भी पहले की तरह ईवीएम से मतदान कर किया जाएगा। 26 अक्तूबर तक ड्रॉफ्ट मतदाता सूचियां तैयार की जाएंगी, 27 से तीन नवंबर तक जिला निर्वाचन अधिकारी के सामने दावे व आपत्तियां प्रस्तुत किए जाएंगे। सभी प्रकार के दावे व आपत्तियां सुनने के बाद 27 नवंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा। बता दें कि राज्य चुनाव आयुक्त की ओर से 12 फरवरी 2021 तक चुनाव कराने का लक्ष्य रखा गया है। जैसे ही चुनाव आयोग की ओर से पंचायत चुनाव का समय निर्धारित किया गया, गांवों की चौपालों में दिनभर नए-पुराने उम्मीदवारों को लेकर चर्चा चलती रही।
वर्तमान में महिला-पुरुष का पंचायतों में हिस्सेदारी..
35 वर्षीय औसत आयु का 18 सदस्यीय जिप हाउस
जिले में 18 सदस्यीय जिला परिषद(जिप) का हाउस है। इसमें 10 पुरुष व 08 महिलाएं हैं। जिला प्रमुुख का पद भी एससी महिला के लिए आरक्षित है। करीब साढ़े तीन साल तक जहां राव इंद्रजीत समर्थक मंजूबाला चेयरपर्सन के पद पर आसीन रही, वहीं रास्ते बदले तो कुुर्सी भी चली गई। अब वर्तमान में राव समर्थक ही शशिबाला चेयरपर्सन के पद पर कार्यरत है। वहीं 2016 में एक युवा हाउस का गठन हुआ था। सदस्यों की औसत आयु भी 35 वर्ष है।
358 में से 139 महिला सरपंच
जिले की 358 पंचायतों में 139 सरपंच महिलाएं हैं। वहीं 76 सरपंच एससी श्रेणी के हैं। इसके अलावा सरपंचों की औसत आयु की बात करें तो यहां पर भी युवाओं की अधिकता है। औसत आयु 39 वर्ष है। इसके अलावा 8वीं पास 56, 10वीं पास 213 12वीं पास 46 व स्नातक पास जिले में 40 सरपंच हैं। बता दें कि वर्ष 2016 में शैक्षणिक योग्यता किए जाने के बाद पढ़े लिखे सरपंचों की संख्या बढ़ गई है।
133 में से 59 महिलाएं ब्लॉक समिति सदस्य
जिले के 133 ब्लॉक समिति सदस्यों में से 59 महिलाएं हैं। इनमें 34 एससी ब्लॉक समिति सदस्य हैं। इनमें से महज 14 सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक या फिर इससे ज्यादा है। वहीं औसत आयु की बात करें तो 35 है। 14 सदस्य 12वीं पास व 89 दसवीं पास हैं। 3149 पंच में से 1370 पंच महिलाएं हैं।
महिलाओं की भागेदारी हो सकती है 50 फीसदी
रेवाड़ी में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार ड्रॉ हो चुका है, लेकिन महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर दोबारा ड्रॉ निकाला जा सकता है। ऐसे में पंचायतों से लेकर जिला परिषदों में भी महिलाओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है।