फरवरी में राजकीय रेलवे पुलिस को रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर 15 वर्षीय एक बच्ची इधर-उधर घूमती हुई मिली थी। जीआरपी के जवानों ने बच्ची से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह मध्यप्रदेश की रहने वाली है। जीआरपी ने बच्ची मिलने के बाद जानकारी बाल कल्याण समिति को दी। समिति की चेयरपर्सन कुसुम शर्मा व अन्य सदस्यों ने बच्ची से प्यार से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसका अपने भाई-बहन से झगड़ा हो गया था। झगड़ा होने के बाद वह ट्रेन में बैठकर रेवाड़ी पहुंच गई। बच्ची अपने परिवार से मिलने के लिए रोने लगी। समिति ने बच्ची को धारूहेड़ा स्थित आशा किरण आश्रम में ठहराया। बच्ची से धीरे-धीरे टीम उसके परिवार के बारे में जानकारी जुटाती रही। टीकमगढ़ पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई। टीकमगढ़ पुलिस की मदद से बच्ची के परिवार का पता लगाया गया। आखिरकार समिति के सदस्यों को कामयाबी मिली और बच्ची के माता-पिता से संपर्क हो पाया। बच्ची के माता-पिता सोमवार को रेवाड़ी पहुंचे तो समिति सदस्यों ने पूछताछ करने के बाद बच्ची को उनके हवाले कर दिया। बच्ची को भी समझाया गया कि आगे से वह घर छोड़कर न आए।
बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन कुसुम शर्मा ने कहा कि बच्ची जैसे ही हमारे पास आई तो हमने उससे प्यार से सारी बातचीत की। लगातार बातचीत का परिणाम यह रहा कि उससे परिवार के बारे में काफी हद तक जानकारी मिल गई। मध्यप्रदेश पुलिस की मदद से उसके परिवार तक पहुंच सके।