संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। बैरमपुर गांव के प्रगतिशील किसान विक्की यादव ने एक बार फिर पारंपरिक खेती की ओर लौटने का प्रयास शुरू किया है। उन्होंने बताया कि करीब 40 वर्ष पहले बैरमपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में चना गांव की प्रमुख फसल हुआ करती थी।
उस समय चने की पैदावार इतनी अच्छी होती थी कि पौधों की ऊंचाई तीन फीट तक पहुंच जाया करती थी। विक्की यादव ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग के बाद धीरे-धीरे चने की फसल क्षेत्र से गायब हो गई। हालात ऐसे हो गए कि आज की युवा पीढ़ी को यह तक जानकारी नहीं है कि चने की फसल खेतों में कैसी दिखती है और किस तरह उगाई जाती है।
इसी चिंता और जिम्मेदारी को महसूस करते हुए विक्की यादव ने अपने ऑर्गेनिक खेत में इस बार चने की फसल का सीमित स्तर पर ट्रायल किया। उन्होंने कहा कि इस प्रयोग के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं और फसल की स्थिति उम्मीद से बेहतर है। इस सफलता के बाद अब वे आने वाले समय में बड़े स्तर पर चना की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं।