संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ज्यादा बारिश होने से मौसम में नमी बढ़ी है जिससे ग्वार फसल पर सफेद मक्खी व हरा तेला और बीमारियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में किसान काफी परेशान हैं।
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने बताया कि किसानों को कीटों व बीमारियों की पहचान कर आवश्यकतानुसार दवाओं का उचित चयन करके प्रयोग करना चाहिए। किसान दवा विक्रेताओं से दवा खरीद कर स्प्रे करते हैं और उसका कई बाद नुकसान होने का डर रहता है।
दवाई खरीदते समय पक्का बिल अवश्य लें। दवा की बोतल पर समाप्ति तिथि अवश्य जांच करें और बिल कटवाते समय बिल में दवा का बैच नंबर अवश्य लिखवाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्वार के पत्ते किनारी से पीला व काला होने से पहले करें।
ज्यादातर किसान ग्वार फसल की कीटों व बीमारियां जब 25 से 30 प्रतिशत प्रकोप हो जाता है उस समय किसान स्प्रे करने की सोचता है। उस अवस्था तक किसानों का काफी नुकसान हो चुका होता है।
ग्वार के पत्तों का किनारी से पीलापन, काला होना, जीवाणु अंगभारी व फंगस रोग आदि बीमारी दिखाई देने से पहले रोकथाम के लिए 30 ग्राम स्ट्रैप्टोसाइक्लीन व 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लिटर पानी में मिलाकर प्रति एकड छिड़़काव करें अगर इन बीमारियों के साथ हरा तेला व सफेद कीड़ों का प्रकोप हो तो उसकी पहचान करके इसके नियंत्रण के लिए 250 मिली मैलाथियान-50 ईसी या डाइमेथोएट (रोगोर) 30 ईसी प्रति एकड़ उपरोक्त घोल में मिलाकर पहला छिड़काव बिजाई के 40-45 दिन पर तथा अगला स्प्रे इसके 12-15 दिन अन्तराल पर करें। ऐसा करने से ग्वार की फसल की पैदावार पर अनुकूल असर पड़ता है।