दो लाख की आबादी के लिए पेयजल व सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र की ओर से अम्रुत योजन के तहत नगर परिषद को मिले 66 करोड़ में से 31 मार्च को करीब 30 करोड़ रुपये लैप्स हो जाएंगे। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और निगरानी के अभाव का यह आलम है कि करोड़ों रुपये का बजट होने के बाद भी पेयजल व सीवर संबंधी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
सीवर संबंधी समस्या की जहां प्रत्येक दिन 15-20 शिकायतें पहुंच रही हैं, वहीं नहरी पानी को भंडारण करने के पर्याप्त संसाधन नहीं होने के चलते एक दिन छोड़कर एक दिन पानी देना शुरू कर दिया गया है। 11 मार्च को बंद हुआ नहरी पानी 5 अप्रैल को आने की बात कही जा रही है। तब तक शहरवासियों के पानी में कटौती जारी रहेगी। बता दें कि करीब दो साल पहले अम्रुत योजना के तहत पेयजल लाइन के लिए करीब 33 करोड़ व सीवर लाइन के लिए भी इतनी ही राशि केंद्र की ओर से रेवाड़ी नगर परिषद को दी गई थी। दोनों परियोजनाओं में ही अधिकारी 50 प्रतिशत राशि का उपयोग भी नहीं कर पाए हैं, जबकि 31 मार्च को अम्रुत योजना समाप्त हो रही है।
जर्जर व पुरानी सीवर लाइन के चलते है ओवरफ्लो की समस्या
हाउस की पहली ही बैठक में सभी 31 पार्षदों ने सीवर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। लापरवाही का आलम ये है कि दो साल पहले अम्रुत योजना के तहत शहर के अंदर की 40 साल पुरानी जर्जर हो चुकी व चार इंच की पाइप लाइन बदलने को शामिल ही नहीं किया गया। जन स्वास्थ्य विभाग की माने तो 32.95 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में से महज 50 फीसदी कार्य ही हुआ है। बता दें कि दो साल पहले 32.95 करोड़ रुपये का टेंडर देकर 47295 मीटर नई पाइपलाइन डालने सहित अन्य पांच कार्य शुरू किए गए थे।
लोगों को मिल रहा गंदा पानी
जन स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की माने करीब 10 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइपलाइन सीवर से होकर गुजरती है। यह सीवर लाइन जर्जर हो चुकी है। अम्रुत योजना के तहत इसको भी बदला जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पुराने शहर से प्रत्येक दिन गंदा पानी आने की समस्या आती है, लेकिन जब तक इस पाइप लाइन को नहीं बदली जाएगी समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। योजना के तहत 4, 6, 8 व 10 इंच की पाइप लाइन डाली जानी थी।
अधर में डब्ल्यूटीपी कार्य
नहरी पानी का शोधन करने की क्षमता बढ़ाने के लिए अम्रुत योजना के तहत कालाका वाटर टैंक पर 15 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूडीपी) का काय शुरू हुआ था। मौजूदा संसाधनों से पूरा दिन शहर को अलग-अलग हिस्सों में पेयजल की सप्लाई की जाती है। सुबह, दोपहर व शाम तीन पालियों में पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। डब्ल्यूटीपी का निर्माण हो गया होता तो शोधन क्षमता बढ़ने से पूरे शहर को सुबह के समय एक साथ पेयजल की आपूर्ति की जा सकती थी, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य महज 70 प्रतिशत ही हो पाया है।
लिसाना में टैंक बनाने का भेजा था प्रपोजल
अम्रुत योजना से पहले ही गांव गोकलगढ़ में वाटर टैंक निर्माण के लिए प्रपोजल तैयार हुआ था। जमीन के लिए करीब 16 करोड़ रुपये की राशि जन स्वास्थ्य विभाग को मिल चुकी थी। टैंक निर्माण पर जमीन सहित करीब 58 करोड़ रुपये खर्च होने थे। लेकिन यहां पर पंचायत की ओर से प्रस्ताव पास नहीं करने से परियोजना अटक गई। अधिकारी या जन प्रतिनिधियों के स्तर पर भी इसके कोई खास प्रयास नहीं किए गए। हालांकि कुछ दिन पहले ही जन स्वास्थ्य विभाग ने झज्जर रोड स्थित लिसाना जलघर में एक अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण के लिए प्रोजेक्ट बनाकर चंडीगढ़ भेजा है। यदि इसको अनुमति मिल भी जाती है तो इस गर्मी में शहरवासियों केे पेयजल किल्लत से राहत मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
भंडारण क्षमता कम होने के चलते शहर में पानी एक दिन छोड़कर एक दिन दिया जाएगा। 11 मार्च को नहरी पानी बंद हुआ था, अब 5 अप्रैल तक पानी आने की बात कही जा रही है। लोगों से अपील है कि पानी की बर्बादी न करें।
-अजय कुमार, जेई, जन स्वास्थ्य विभाग (पानी)
अम्रुत योजना के तहत बाईपास पर सीवर पाइललाइन डालने का काम चल रहा है। इसके चलते कुछ स्थानों पर सीवर ओवरफ्लो की समस्या है। स्थायी समाधान के लिए एक और मोटर लगाई जा रही है। दिन में जो भी शिकायतें आती हैं उनका समाधान किया जाता है।
-दीपक यादव, जेई, जन स्वास्थ्य विभाग (सीवर)।
कोरोना के चलते छह माह का समय बढ़ा दिया गया था, बावजूद इसके ठेकेदार ने बेहद धीमा कार्य किया। ठेकेदार पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। देरी के चलते आधे कार्य शुरू तक नहीं हो पाए हैं।
हेमंत कुमार, एक्सईएन, नप रेवाड़ी।