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तपती धूप में भी कम नहीं हो रहे किसानों के हौंसले

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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों का आंदोलन रविवार को 92वें दिन भी जारी रहा। पहले जहां किसानों ने बारिश और ठंड का सामना किया। अब किसानों के सामने तेज धूप मुसीबत बन रही है। हालांकि किसानों का हौसला कम होने की बजाए बढ़ ही रहा है। किसानों ने गर्मी से बचने के लिए कई तरह के इंतजाम किए हैं। ठहरने के लिए छप्पर की तरह झोपड़ी बनाई जा रही है तो गर्मी से बचने के लिए कूलर भी लगाए जा रहे हैं। कुछ पक्के मकान भी बन गए हैं। वहीं रविवार को राजस्थान के अलवर व दौसा जिले से किसानों का एक जत्था धरनास्थल पर पहुंचा।
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बता दें कि कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए 13 दिसंबर को दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। इसके बाद से किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया। किसानों को समर्थन देने के लिए रोजाना यहां किसान पहुंच रहे हैं।
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आमसभा में किसान नेताओं ने कहा कि पिछले साल 6 जून को केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों के लिए लाए अध्यादेशों के साथ ही शुरू हुआ किसानों का ऐतिहासिक आंदोलन आज दिल्ली के चारों ओर चल रहा है। किसानों का आंदोलन शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से सफलतापूर्वक गुजरता हुआ एक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन बन चुका है। इसीलिए केन्द्र सरकार इस आंदोलन को अपने सामने एक राजनीतिक चुनौती की तरह मानते हुए इस आंदोलन पर राजनीतिक हमले कर रही है। जबकि किसानों के संगठनों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से गैर राजनीतिक है।
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इस मौके पर अमराराम, राजवीर सिंह, बलवीर छिल्लर, सुभाष पकडिये, फूल सिंह बेरला, कुलदीप, चांद कंवर, पेमाराम, भूप सिंह बारहठ, रामरतन किसान, राजाराम मील, जवाहर लाल सोनी, मोहन नेता, सुरेंद्र भद्रकाली, राधेश्याम शुक्लावास व रामकिशन महलावत आदि ने धरने को संबोधित किया।
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