संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। औद्योगिक कस्बा धारूहेड़ा के दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर स्थित बस स्टैंड भवन के कंडम होने के बाद अब नए भवन की भी संभावनाएं बढ़ गई हैं। नए भवन के लिए लोक निर्माण विभाग ने लगभग 15 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर निदेशालय को भेज दिया है, वहां से अप्रूव्ल मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कंडम होने की वजह से रोडवेज ने इस बिल्डिंग को गिरवा दिया था ताकि किसी भी प्रकार का कोई हादसा नहीं हो जाए।
हाईवे पर खड़े होकर वाहनों का करना पड़ रहा इंतजार
सुनकर हैरानी जरूर होगी, लेकिन करोड़ों का राजस्व देने वाले धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में दो साल से बस स्टैंड ही नहीं है। आलम यह है कि बसों का इंतजार करने के लिए भी लोगों को दिल्ली-जयपुर हाईवे पर खड़ा होना पड़ रहा है। हाईवे जो वाहनों के सरपट दौड़ने के लिए है, उसपर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हुए हर रोज सैकड़ों लोग अपनी जान को जोखिम में डालते हैं। दो साल पूर्व धारूहेड़ा बस स्टैंड के जर्जर भवन को मानवाधिकार आयोग के आदेश के बाद ध्वस्त कर दिया गया था।
यहां हजारों प्रवासी श्रमिकों की आबादी
दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में 250 से 300 छोटी-बड़ी उत्पादन इकाइयां हैं। हजारों की तादाद में यहां श्रमिक कार्यरत हैं। इसके साथ ही धारूहेड़ा के आसपास 50 के लगभग गांव हैं, जिनमें बड़ी आबादी रहती है। धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र हर साल करोड़ों का राजस्व देता है, लेकिन इसके बावजूद इस औद्योगिक क्षेत्र में आजतक मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर ही बस स्टैंड की जमीन है। यहां पर बना भवन काफी जर्जर हो गया था। इस जर्जर भवन को गिरा दिया गया है ताकि कोई हादसा ना हो सके।
प्राइवेट वाहनों में बैठना मजबूरी, कई बार लूट हो चुकी
धारूहेड़ा में नया बस स्टैंड बनाया जाना इसलिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि धारूहेड़ा से आवागमन के लिए दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, मानेसर, कोटपूतली, नीमराना, कोटा, भिवाडी, अलवर, तिजारा, खुशखेड़ा, पलवल, सोहना, आगरा, मेवात, बावल व रेवाड़ी समेत तमाम शहरों के लिए यहां से लोग गुजरते हैं। बस स्टेंड के अभाव के चलते सवारियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए किसी ना किसी वाहन में बैठकर जाना मजबूरी बना हुआ है और इसी का फायदा उठा कर धारूहेड़ा से सवारियों को लिफ्ट दे कर लूटपाट की बहुत सी घटनाएं हो चुकी हैं।
धारूहेड़ा में बस स्टैंड के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने निदेशालय को एस्टीमेट बनाकर भेज दिया है। वहां से अप्रूवल आने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- रवीश हुड्डा, महाप्रबंधक, रोडवेज