धारूहेड़ा (रेवाड़ी)। राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के पास बना मिट्टी का कच्चा तटबंध शनिवार की शाम टूट गया। इससे दूषित पानी धारूहेड़ा-भिवाड़ी बाईपास पर भर गया। कई स्थानों पर 2 से 3 फीट तक जलभराव होने से यातायात बाधित रहा। हरियाणा रोडवेज की बस भी जलभराव में फंस गई जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। आसपास की कॉलोनियों में बदबूदार पानी घुस गया है।
रेवाड़ी-पलवल राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-919) से जुड़े इस बाईपास मार्ग पर कई स्थानों पर करीब 2 से 3 फीट तक पानी भर गया है। जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों की आवाजाही ठप हो गई है। चार पहिया वाहनों के चालक जोखिम उठाकर गुजर रहे हैं। सड़क पर जलभराव से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब हरियाणा रोडवेज की एक बस जलभराव वाले हिस्से में फंस गई। बस के रुकने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ी।
हर वर्ष बारिश के मौसम में जलभराव की मार झेलने वाला यह क्षेत्र इस बार बिना बारिश के ही गंदे और दूषित पानी से घिर गया है। औद्योगिक क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों से निकलने वाले दूषित पानी की समुचित निकासी नहीं होने के कारण बाईपास पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
सड़क पर जलभराव के कारण न सिर्फ यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है बल्कि आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूषित पानी भगत सिंह कॉलोनी समेत आसपास की अन्य कॉलोनियों में घुस गया है जिससे वहां के लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
पानी रोकने का हो स्थायी समाधान
स्थानीय नागरिक राहुल कुमार ने बताया कि हर बार मिट्टी का बांध बनाकर पानी रोकने का प्रयास किया जाता है लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। विजेंद्र यादव ने बताया कि दूषित पानी के कारण दुर्गंध फैल रही है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दूषित पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था कर लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान किया जाए।
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समाधान के लिए केंद्र सरकार की 5 माह पहले हुई थी बैठक
क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं लेकिन अभी जमीनी स्तर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर 5 माह पहले दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के शीर्ष नेता व अधिकारी शामिल हुए थे। जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए नितिन गडकरी ने अधिकारियों को 6 किलोमीटर लंबी ड्रेन का निर्माण कराने के लिए सर्वे कराने का निर्देश दिया था। जलनिकासी की इस परियोजना पर 150 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें राजस्थान और हरियाणा की सरकारें 25-25 करोड़ रुपये देंगी और शेष राशि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण वहन करेगी। बैठक के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 25 करोड़ रुपये देने की सहमति दी थी।