रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने आने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर जरूर आई है लेकिन राहत अभी पूरी तरह नहीं मिली है। अस्पताल को नई और आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन मिल गई है।
इससे उम्मीद थी कि मरीजों की लंबे इंतजार वाली परेशानी खत्म हो जाएगी लेकिन मशीन आने के बाद भी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी बनी हुई है जिससे मरीजों की समस्या कम होने के बजाय लगभग वैसी की वैसी बनी हुई है।
अस्पताल में इस समय कुल दो अल्ट्रासाउंड मशीनें मौजूद हैं। एक पुरानी मशीन पहले से चल रही थी और अब एक नई मशीन आ गई है लेकिन बड़ी समस्या यह है कि अस्पताल में जांच करने के लिए सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट है। उनको सीटी स्कैन यूनिट में भी ड्यूटी देनी होती है। ऐसे में दोनों मशीनों को एक साथ चलाना संभव नहीं हो पा रहा है।
दिनभर में सिर्फ 30 से 35 ही होते हैं अल्ट्रासाउंड
अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं जिन्हें डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच लिखते हैं लेकिन स्टाफ कम होने के कारण दिनभर में सिर्फ 30 से 35 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं। यही वजह है कि मरीजों को कई-कई दिनों बाद की तारीख दी जाती है। कई मरीजों को तो एक महीने बाद नंबर मिलता है जो उनके लिए बहुत परेशानी का कारण बन जाता है। मरीजों का कहना है कि कई बार उन्हें बाहर निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है जहां खर्च भी ज्यादा आता है। गरीब और साधारण परिवार के लोगों के लिए सरकारी अस्पताल ही सहारा होता है इसलिए वहां समय पर सुविधा मिलना बहुत जरूरी है।
सिर्फ इमरजेंसी मरीजों और गर्भवतियों के ही होते हैं अल्ट्रासाउंड
अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण स्थिति ऐसी हो गई है कि फिलहाल सिर्फ इमरजेंसी मरीजों और गर्भवती महिलाओं के ही अल्ट्रासाउंड किए जा पा रहे हैं। बाकी मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल रही और कई बार उन्हें कई-कई दिनों बाद की तारीख दी जाती है। नई मशीन आने के बाद भी रेडियोलॉजिस्ट कम होने के कारण काम पूरा नहीं हो पा रहा जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नई मशीन का इंस्टालेशन का काम बाकी
नई अल्ट्रासाउंड मशीन का इंस्टालेशन कार्य पूरा होने के बाद ही जांच शुरू हो पाएगी। जिला नागरिक अस्पताल में यह मशीन कहां पर लगेगी अभी फाइनल नहीं है क्योंकि पुरानी बिल्डिंग को अनसेफ घोषित कर दिया गया है। ऐसे में यह बिल्डिंग तोड़ी जानी है। इसके चलते अस्पताल की गायनी और चाइल्ड ओपीडी के साथ ही अल्ट्रासाउंड को भी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है। इस वजह से जब तक जगह फाइनल नहीं हो जाती तब तक नई अल्ट्रासाउंड मशीन को शुरू करना भी संभव नहीं है क्योंकि नई अल्ट्रासाउंड मशीन लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ ही जगह भी बतानी पड़ती है कि कहां पर लगेगी।
वर्जन:
सरकार द्वारा विशेषज्ञों की भर्ती की जानी है। उसकी प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होती है। उसके बाद परेशानी नहीं होगी। -डॉ. नरेंद्र दहीया-सिविल सर्जन, रेवाड़ी