संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। श्रमिकों का न्यूनतम वेतन निर्धारण करने की प्रक्रिया में एआईयूटीयूसी ने श्रमायुक्त को ई-मेल कर अपना दावा व प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। इसमें प्रदेश में श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई है।
श्रम विभाग प्रदेश के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन पिछले 10 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद रिवाइज करने के लिए कार्यरत हुआ है, जबकि कानूनन प्रत्येक 5 वर्ष में यह दोबारा निर्धारित हो जाना चाहिए।
हरियाणा सरकार ने न्यूनतम वेतन को 10 साल तक निर्धारित नहीं किया जिससे प्रदेश के श्रमिकों को काफी आर्थिक नुकसान और उद्योगपतियों, नियोक्ताओं, मालिकों को फायदा पहुंचा है। यदि यह वेतन 5 साल पहले रिवाइज होता तो बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन प्रदेश के श्रमिकों को 5 साल पहले ही मिलना शुरू हो जाता।
एआईयूटीयूसी हरियाणा प्रदेश कमेटी की लगातार मांग के बाद श्रम विभाग अब अनुसूचित जाति के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन रिवाइज करने के लिए तैयार हुआ है। एआईयूटीयूसी के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने न्यूनतम वेतन रिवाइज कमेटी की ओर से 18 जुलाई को गुरुग्राम में बुलाई गई बैठक में सुझाव रखे थे।
उसी क्रम में प्रदेश सचिव हरिप्रकाश ने लिखित प्रतिवेदन पेश किया है। प्रतिवेदन में मांग की गई है कि अनुसूचित श्रमिकों को कम से कम 30 हजार रुपये प्रति माह न्यूनतम वेतन दिया जाए।