संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। कृषि महाविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित कृषि और सामाजिक विज्ञान डेटा में विश्लेषण के लिए सांख्यिकीय उपकरणों पर दो सप्ताह की क्षमता निर्माण कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान प्रिंसिपल डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि विकास नीतियों में डेटा की अहम भूमिका होती है।
डॉ. कौशिक ने कहा कि यह कार्यक्रम शोधकर्ताओं, विद्वानों, शिक्षाविदों के एक गतिशील समूह का विश्लेषणात्मक कौशल बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया है। हम ऐसे समय में रहते हैं जहां डेटा प्रचुर मात्रा में नहीं है।
सामाजिक विज्ञान में डेटा हमें मानव व्यवहार को समझने, हस्तक्षेप का आकलन करने और विकास नीतियों में सार्थक योगदान देने की अनुमति देता है। इस कार्यक्रम में देश के सात राज्यों के 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कुल 36 सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को कोर सांख्यिकीय अवधारणाओं से परिचित कराया गया। उन्हें एसपीएसएस, आर, और एक्सेल जैसे आधुनिक सॉफ्टवेयर टूल्स के बारे में बताया गया।
उन्हें परिकल्पना परीक्षण, प्रतिगमन विश्लेषण, एनोवा और मल्टीवेरिएट विश्लेषण जैसी तकनीकों में प्रशिक्षित किया गया। डॉ. अलीशा पाठ्यक्रम समन्वयक ने सभी अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत किया। अलीशा ने 14 दिन की कार्यवाही भी प्रस्तुत की। इस अवसर पर सभी वैज्ञानिक मौजूद थे।