रेवाड़ी। सरकार की तरफ से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए लगाए जाने वाले ‘साइकिल मेले’ की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मेले में बच्चों को साइकिल महंगी वाली पसंद करवाई जा रही है, जबकि सरकार की ओर से जो अनुदानित राशि दी जा रही है, वह कम है। मेले में इस कीमत की साइकिल ही नहीं है। मंगलवार को सरकारी स्कूलों में लगने वाले साइकिल मेले की पड़ताल के दौरान पता चला कि विद्यार्थियों को अनुदान के तौर पर मिलने वाली राशि काफी कम है।
मंगलवार को शिक्षा विभाग की तरफ से रेवाड़ी शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बाल) में साइकिल मेला लगाया गया। इसका शुभारंभ उप जिला शिक्षा खुशीराम ने किया। इसमें छठी कक्षा के विद्यार्थियों को उनके घर से स्कूल तक आने-जाने में सहूलियत मिल सके इसलिए लिए उन्हें खुद की साइकिल खरीदने के लिए अनुदान राशि का प्रावधान किया है। बड़ी संख्या में साइकिल मेले में विद्यार्थी शामिल हुए। बच्चों ने अपनी पसंद की साइकिल भी चुनी, लेकिन अनुदान के मुताबिक साइकिल की कीमत कही ज्यादा है।
शिक्षा विभाग की तरफ से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के बच्चों को यह सहायता राशि दी जाती है। इसमें साइकिल खरीदने के लिए छात्राओं को 2800 रुपये और छात्रों को 3 हजार रुपये दिए जाते हैं। मंगलवार को साइकिल मेले में हीरो, प्रिंस, एड-वे, रेड-विन, ट्वीन आदि कंपनी के प्रतिनिधि शामिल हुए। अब साइकिल की कीमत की बात करें तो इन कंपनियों में से किसी भी कंपनी की साइकिल की कीमत 3500 रुपये से कम नहीं है। ऐसे में अगर सबसे कम कीमत की साइकिल भी कोई विद्यार्थी खरीदना चाहे तो उसके अभिभावक को 500 से 1000 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
हालांकि काफी बच्चें ऐसे हैं, जिनके अभिभावक साइकिल खरीदने के लिए बची हुई राशि का भुगतान कर दें, लेकिन ऐसे बच्चों की संख्या भी काफी ज्यादा है, जिनके लिए 500 से 1000 रुपये देना भी मुश्किल हैं। मेले की बात करें तो यहां साइकिल कंपनियों द्वारा 2 स्टॉल लगाई गई थीं। इसके अलावा हर ब्लॉक ऑफिस से प्रतिनिधि आए हुए थे, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से 3 फार्म भरवाएं, इनमें एक विद्यार्थियों को अपने पास रखना है, दूसरा फार्म ब्लॉक ऑफिस के पास और तीसरा फ़ॉर्म साइकिल कंपनी के पास जमा कराना होगा। फार्म में साइकिल की कीमत के अलावा अदायगी राशि दर्ज करनी जरूरी है। इसके बाद विभाग की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद बच्चों द्वारा चुनी गई साइकिल पर मिलने वाली अनुदान की राशि को कंपनी के पास सीधे भेजा जाएगा। बची हुई राशि को बच्चों को अभिभावकों को देना होगा, तब जाकर विद्यार्थी को साइकिल मिलेगी।
- वर्जन
इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सरकार की तरफ से जो राशि दी जा रही है। उससे अतिरिक्त राशि अभिभावक को देनी होगी।
- नसीब सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी।