संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्टेट टीबी विंग ने टीबी मरीजों की पहचान के लिए सीवाई-टीबी इंजेक्शन लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन और स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दिया गया है। जिसमें उनको लगाने के तरीके बताए गए हैं। इस इंजेक्शन की खासियत है कि इससे टीबी मरीजों की सटीकता के साथ पुष्टि होगी। यह इंजेक्शन विशेष तौर पर रोगी के संपर्क में रहने वालों को लगाए जाएंगे। इसकी जिले को 1200 डोज मिली हैं।
इंजेक्शन से 36 घंटे में टीबी मरीजों की पहचान हो सकेगी। सिविल अस्पताल में यह कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। अब सीएचसी-पीएचसी में भी इसका प्रयोग किया जाएगा। सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन और स्टाफ नर्स को ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें उनको लगाने के तरीके बताए जा रहे हैं। ये इंजेक्शन केवल रोगी के संपर्क में आने वालों को ही लगेंगे। इससे पहले टीबी के मरीजों की जांच करने के लिए मॉटेक्स इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता था, लेकिन अब टीबी विंग की ओर से मॉटेक्स की जगह सीवाई-टीबी इंजेक्शन मरीजों को लगाया जाएगा।
डिप्टी सिविल सर्जन व टीबी जिला नोडल अधिकारी डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान-2025 के तहत स्टेट टीबी विंग टीबी मरीजों की पहचान करने के लिए सीवाई-टीबी इंजेक्शन की शुरूआत की है। सीवाई-टीबी इंजेक्शन से 36 से 48 घंटे तक के समय में टीबी मरीजों की पहचान हो सकेगी।
बाए बाजू में लगेगा इंजेक्शन
डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि बाए बाजू की त्वचा के नीचे थोड़ी मात्रा में इंजेक्शन लगाया जाएगा। इंजेक्शन वाली जगह पर तुरंत एक छोटा सा बुलबुला या छाला दिखाई देगा। टीका लगने के बाद अगर इंड्युशन 5 एमएम से अधिक आता है तो उसे संक्रमित माना जाता है। वहीं सीवाई-टीबी इंजेक्शन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को लग सकता है।
वर्जन:
जिले को सीवाई-टीबी इंजेक्शन की 120 बोतल उपलब्ध कराई गई है। एक बोतल में से 10 मरीजों को इंजेक्शन लगाया जा सकता है। ऐसे में जिले में सीवाई-टीबी इंजेक्शन की 1200 डोज प्राप्त हुई हैं। सिविल अस्पताल में शुरू हो गए हैं। अब अन्य सेंटरों पर पहुंचाया जाएगा। इन सभी जगह पर ये इंजेक्शन लगाए जाएंगे। - डॉ. दीपक वर्मा, नोडल अधिकारी