घरों से मीटर बाहर निकालने के पहले चरण के अभियान के दौरान मीटर जलाने एवं टेंपरिंग कर निगम को लाखों को चूना लगाने का बड़ा खुलासा हुआ है।
निगम ने जांच में पाया कि उपभोक्ता रीडिंग को छुपाने के लिए मीटर को जला देते हैं। पहले चरण में निगम के सामने लगभग 250 मीटर जले हुए सामने आए हैं। फीडर से हो रही बिजली सप्लाई एवं बीलिंग में आ रहे भारी अंतर से बिजली निगम को भारी नुकसान हो रहा है।
लैब में मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला है या फिर उपभोक्ता ने स्वयं जलाया है, इसका आसानी से पता चल जाता है। निगम ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए उपभोक्ता के खिलाफ बिजली चोरी के मामला दर्ज कराने के साथ एक साल में आई यूनिटों को डबल रेट से भुगतान करा रहा है। बता दें कि दादरी भेजे गए 250 में से 33 मीटरों की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, इनमें दस मीटर ऐसे पाए गए हैं, जो उपभोक्ताओं ने छेड़छाड़ कर मीटर जलाए हैें। निगम की ओर से विजय नगर में साढ़े बारह लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है।
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कुछ ऐसे घहराया शक...
बिजली निगम की यूनिट सप्लाई एवं बिलिंग में आ रहे भारी अंतर से निगम को भारी चूना लग रहा था। निगम के इंजीनियरों की ओर से लाइन लोस में बेकार हुई यूनिटों के औसत के बाद भी यह अंतर भारी पाया गया। इसके बाद निगम की ओर से जिले में घरों के अंदर लगे मीटरों को बाहर लगाने का अभियान शुरू। इस दौरान केवल विजय नगर फीडर में ही लगभग 150 मामले ऐसे सामने आए, जिनमें मीटर जले हुए थे। जब निगम की ओर से मीटरों को जांच के लिए लैब में भेजा गया तो सामने आया कई मीटरों को रीडिंग छुपाने के लिए उपभोक्ताओं ने स्वयं जलाया था। इसके बाद निगम ने शिकंजा कसने के लिए जले हुए सभी मीटरों की लैब भेजने की तैयारी कर ली है।
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इसलिए जलाते हैं और यह कार्रवाई करता है विभाग
उपभोक्ताओं के मीटर घर के अंदर लगे होने के कारण जहां कुछ उपभोक्ता टेंपरिंग कर बिजली चोरी करते हैं, वहीं कुछ सीधे कुंडी डालकर बीजली चोरी करते हैं। लेकिन बाहरी कॉलोनियों विकास नगर, विजय नगर, उत्तम नगर एवं अन्य कॉलोनियों मेें उपभोक्ता रीडिंग को छुपाने के लिए मीटर को ही आग के हवाले कर देते हैं तथा इसका कारण इलेक्ट्रिक फॉल्ट बताते हैं। पिछले दिनों में जब शहर में मीटरों को घर से बाहर निकालने का काम शुरू हुआ तो निगम को घर के अंदर जले हुए मीटर मिले। केसों की संख्या अधिक होने के कारण निगम का शक गहराया और जले हुए सभी मीटरों को दादरी लैब में भेजने का निर्णय लिया।
जांच के वक्त उपभोक्ता को बुलाया जाता है
लैब में टेस्टिंग के लिए भेजे गए मीटरों की जांच के लिए उपभोक्ताओं की उपस्थित के लिए नोटिस भेजा जाता है। उपभोक्ताओं के दादरी नहीं पहुंचने की स्थिति में दो एसडीओ की कमेटी बनाकर उनकी उपस्थिति में मीटर की जांच होती है। जांच के दौरान यह खुलासा हो जाता है कि मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला या फिर उपभोक्ता ने जलाया। उपभोक्ता द्वारा जलाए जाने पर निगम द्वारा चोरी का केस बनता है,वहीं पूरी साल की यूनिट भी मीटर में पता चल जाती है। इसके बाद निगम उपभोक्ता की पूरी साल की यूनिटों को जोड़कर यूनिट की दर से दोगुना रेट पर बिल बनाकर उपभोक्ता से वसूल करता है।
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वर्जन
यह बात सच है कि लोग रीडिंग छुपाने के लिए मीटर जलाने के लिए अनेक लोग सहारा ले रहे हैं। निगम जले हुए सभी मीटरों की जांच लैब में कराएगा,जिसके उपभोक्ता की चोरी पकड़ी जाएगी तथा उस पर चोरी का केस दर्ज किया जाएगा। ऐसे अनेक मामले सामने भी आ चुके हैं।
-बुधराम,एसडीओ, बिजली निगम