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वर्ष 2021 तक रोडवेज के 92 प्रतिशत कर्मचारी हो जाएंगे सेवानिवृत

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प्रशिक्षु कर्मचारियों के भरोसे दौड़ रही हैं रोडवेज की बसें
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वर्ष 2021 तक रोडवेज के 92 प्रतिशत कर्मचारी हो जाएंगे सेवानिवृत्त
- वर्ष 1987 के बाद रोडवेज में नहीं हुई है भर्ती
- मैकेनिक के अभाव में बसों की सही समय पर नहीं हो पा रही मरम्मत, गुणवत्ता भी राम भरोसे
महेश कुमार यादव
रेवाड़ी। शहर में रोडवेज की बसें अस्थाई (अप्रेंटिस) कर्मचारियों के भरोसे चल रहीं है। रोडवेज कार्यशाला में 24 मैकेनिक व 23 हेल्पर है। वहीं 53 अस्थाई कर्मचारी है। रोडवेज बसों की मरम्मत की बागडोर अस्थाई कर्मचारियों के हाथों में है। वहीं प्रति वर्ष लगभग 6 से 7 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। जबकि डिपो में वर्ष 1987 से मैकेनिक की भर्ती ही नहीं हुई है। सरकार की ओर से ग्रुप डी के 21 हेल्पर मिलने के बाद थोड़ी राहत मिली है। बता दें कि रोडवेज कार्यशाला में फिलहाल में 24 मैकेनिक कार्यरत है। उनमें से 18 मैकेनिक की दिन की ड्यूटी रहती है व चार की रात में होती है। एक मैकेनिक टायरमैन व एक को नाइट शिफ्ट इंचार्ज बनाया हुआ है। मैकेनिकों की कमी के कारण भी रोडवेज को नुकसान हो रहा है। रेवाड़ी डिपो में 141 रोडवेज की बसें है। डिपो की कार्यशाला में प्रतिदिन दस से 10 बसें मरम्मत के लिए आती हैं। मैकेनिक कर्मचारियों के अभाव में प्रतिदिन 5-6 बसें खड़ी रहती हैं और मात्र 130 से 135 बसें ही ऑन रूट रहती है। रेवाड़ी डिपो में तैनात 24 मैकेनिक में से इस वर्ष सात कर्मचारी रिटायर होंगे। जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2018 तक लगभग 20 कर्मचारी रिटायरमेंट ले चुके है।
ये स्टाफ के मापदंड
रोडवेज विभाग के मापदंड के अनुसार वर्कशॉप में बसों की संख्या के हिसाब से स्टाफ 1:2 का अनुपात होना चाहिए। रेवाड़ी डिपो में इस समय 150 बसें हैं। लेकिन डिपो में केवल 73 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं 53 अप्रेंटिस कर्मचारी है। कार्यशाला में इन दिनों मैकेनिक कर्मियों की कमी है। इस कारण मरम्मत के लिए आने वाली बसें डिपो में 4-5 दिन तक खड़ी रहती हैं। यात्री रोडवेज बसों के अभाव में परेशान रहते हैं।
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1987 में बंद हो गई थी स्थायी भर्ती
सरकारें रोडवेज के निजीकरण पर तुली है। इसका स्पष्ट उदाहरण यह है कि वर्कशॉप स्टाफ की स्थायी भर्ती 1987 में ही बंद हो गई थी। किसी भी सरकार ने भी रोडवेज वर्कशॉप की ओर ध्यान नहीं दिया। जिसका परिणाम यह है कि रोडवेज कर्मचारियों के अभाव से जूझ रहा हैं।
प्रति वर्ष हो रहें सात कर्मचारी रिटायर
रेवाड़ी डिपो में लगातार मैकेनिक रिटायर होते जा रहे हैं। साल 1987 के बाद वर्कशॉप में स्थाई भर्ती नहीं हुई है। वर्ष 2019 में सात मैकेनिक रिटायर होने वाले है। वर्ष 2010 में भी लगभग 10 कर्मचारी रिटायर हुए हैं। 31 अक्टूबर 2021 तक 22 कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे। बाकी बचे दो भी वर्ष 2025 में रिटायर होने वाले है।
एक स्थायी कर्मचारी के बदले लगाते हैं छह अप्रेंटिस छात्र
रोडवेज विभाग की वर्कशॉप में स्थायी तौर पर लगने वाले नए कर्मचारी को करीब 30 हजार रुपये तनख्वाह मिलती है। वहीं, अप्रेंटिस करने वाले छात्रों को भत्ते के तौर पर पांच-छह हजार रुपये मिलते हैं। इसके हिसाब से एक कर्मचारी की जगह छह अप्रेंटिस करने वाले छात्र रोडवेज की वर्कशॉप में कार्य करते हैं। लेकिन अनट्रेंड छात्रों द्वारा किए जाने वाले कार्य की वजह से गुुणवत्ता में कमी आती है।
वर्कशॉप में स्थायी भर्ती होनी चाहिए। ताकि समय पर रोडवेज बसों की मरम्मत करवाई जा सके और रोडवेज का बेड़ा आगे बढ़ सके। रेवाड़ी रोडवेज के डिपो में इस समय सबसे खराब हालात चल रहे हैं। डिपो की वर्कशॉप को अब पूरी तरह से अप्रेंटिस करने वाले छात्र चला रहे हैं।
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देवेंद्र तिवाड़ी, प्रदेश प्रवक्ता, रोडवेज यूनियन।
वर्जन
डी ग्रुप की भर्ती के तहत डिपो को 23 हेल्पर मिले थे, ये हेल्पर जल्द ही प्रशिक्षित हो जाएंगे। फिलहाल बसों की मरम्मत का कार्य सुचारु चल रहा है। काम प्रभावित होने वाली कोई बात नहीं है।
- राजीव नागपाल, रोडवेज महाप्रबंधक
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