अभी तक लोग बैंकों में अपने खाते से ऑनलाइन ठगी और एटीएम पासवर्ड की जानकारी लेकर ठगी करने वालों से ही परेशान थे। अब आयकर की दहशत से जिले के लोगों के होश उड़ा दिए हैं। हैरत की बात यह है कि बैंक की शाखा का डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड भी उनके पास है और पिन नंबर भी किसी को नहीं बताया। इसके बावजूद भी उनके खाते खाली कर रहे हैं।
पुलिस ऐसे मामलों को ट्रेस नहीं कर पा रही और बैंकों के पास इससे निपटने का कोई तोड़ नहीं है। जिले भर में पिछले एक साल के दौरान जून तक ऑनलाइन ठगी के लगभग पांच सौ मामले दर्ज किए गए। इनमें से 30 फीसदी मामले ऐसे थे, जिनमें उपभोक्ता की जेब में एटीएम कार्ड होने व किसी को न पासवर्ड में बताने के बावजूद खाते से रुपये निकाल लिए गए। पुलिस की जांच में सामने आ रहा है कि अपराधी एटीएम क्लोन, ड्राइव ग्लू और वेब कैमरा सहित अन्य तरीकों से लोगों के खाते से रुपये निकालने लगे हैं। ऐसे में अपराधियों को ना तो ग्राहक एटीएम कार्ड की जरूरत पड़ती है और ना ही पासवर्ड की।
ऑनलाइन ठगी के मामले में खातों से उड़ चुके 10 लाख से ज्यादा
वैसे तो ऑनलाइन ठगी के माध्यम से लेकर जिलेभर के उपभोक्ताओं को 10 लाख से ज्यादा रुपयों का चूना लगा चुके हैं। मगर बिना एटीएम और पासवर्ड जाने ग्राहकों से भी करीब तीन लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं। इनमें से सिर्फ चुनिंदा मामलों में ही ग्राहकों के खातों में रकम वापस आई, जबकि अधिकतर बैंकों और पुलिस थानों के चक्कर काट रहे हैं।
स्किमर डिवाइस के जरिए क्लोनिंग
इस तरह का फ्रॉड स्कीम के जरिए ज्यादा हो रहा है। स्किमर एक ऐसा डिवाइस है जो एटीएम में कार्ड डालने की जगह फिट किया जाता है। इसके जरिए आपके एटीएम कार्ड का मैग्नेटिक डाटा स्किमर में छप जाता है। फिर उसी के जरिए डुप्लीकेट कार्ड यानी क्लोन बनाया जाता है। इसे बहुत सफाई से कार्ड की जगह पर फिक्स किया जाता है।
ड्राई ग्लू
इसके अलावा ड्राई ग्लू एक ऐसा ग्लू है जिसे मशीन के की पैड के ऊपर लगाया जाता है। ताकि कई बार कोशिश करने पर भी ग्राहक पैसा नहीं निकाल पाए। इसी दौरान एटीएम केबिन में ग्राहक के पीछे खड़ा अपराधी ग्लू हटाकर उपभोक्ता के द्वारा किए गए प्रोसेस ट्रांजेक्शन से पैसा निकाल लेता है।
वेब कैमरा
अपराधियों द्वारा वेब कैमरा को भी ठगी में प्रयोग किया जा रहा है। इसे मशीन के ठीक ऊपर की तरफ लगाया जाता है ताकि ग्राहक के कार्ड और पिन नंबर को कैमरे में कैद करके डुप्लीकेट कार्ड बनवाया जा सके।
मैसेज के जरिए
आयकर विभाग की आड़ में ठगी को अंजाम देने का नया तरीका सामने आया है। गिरोह की तरफ से लोगों को मोबाइल पर मैसेज भेजा जा रहा है कि आयकर विभाग की ओर से आपका रिफंड भेजा जा रहा है। इस मैसेज के साथ एक लिंक भेजा जाता है जिसे भरने के लिए कहा जाता है। अगर कोई झांसे में आकर लिंक पर क्लिक कर उसे भर देता तो फिर चंद सेकेंड में वह ठगी का शिकार हो जाता है।
कार्ड की लिमिट बढ़ाने के लिए
क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर भी लोगों को चूना लगाया जा रहा है। फर्जी बैंक प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन किया जाता है कि ग्राहक लेनदेन को देखते हुए आपकी क्रेडिट लिमिट बढ़ाई जा रही है। इसके बाद गिरोह की ओर से फोन पर ही कुछ डिटेल भरने के लिए कहा जाता है। फिर ग्राहक के मोबाइल में ओटीपी आता है जिसे वह ग्राहक से हासिल कर लेता है।
अपराधी ही तैयार करते हैं एटीएम का क्लोन
सिमर डिवाइस में डाटा लेने के बाद पहले अपने कंप्यूटर में स्किमर डिवाइस के माध्यम से कार्ड की डिटेल कॉपी करता था। इसके बाद कंप्यूटर की मदद से खाली कार्ड पर सारा डाटा और अपलोड कर देता है। फिर आरोपी क्लोन के माध्यम से शहर से बाहर जाकर रुपये निकालता है।
इन बैंकों के उपभोक्ताओं से हो रही ज्यादा ठगी
ऐसी ठगी के ज्यादा मामले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाताधारकों के है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, आईडीबीआई व आईसीआईसीआई के खाता धारक भी शिकार बने हैं।
ग्राहक साबित कर दे कि भुगतान फ्रॉड है तो बैंक करेगा भरपाई
कई बार दूरदराज के स्टोर में ग्राहक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग कर ली जाती है। जबकि डेबिट कार्ड ग्राहक की जेब में होता है ऐसी शिकायतों की बढ़ती संख्या के चलते भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 जुलाई 2017 को अधिसूचना जारी की थी। इसके मुताबिक यदि ग्राहक साबित कर देता है कि भुगतान फ्रॉड है तो नुकसान की भरपाई बैंक को करनी पड़ती है। इसके अलावा यदि बैंक कर्मचारी फ्रॉड में संलिप्त पाए गए तो इसका खामियाजा भी बैंकों को ही भुगतना होगा।
ऐसे करे बचाव
- मशीन की जांच करे। अपराधी एटीएम कार्ड पैनल से छेड़छाड़ करते हैं। इससे बचने के लिए एटीएम कार्ड पैनल को जरूर ध्यान से देखना चाहिए।
- पिन नंबर बदलते रहे, खातों को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर एटीएम का पिन भी बदलते रहना चाहिए। अगर हर 3 से 5 माह में एटीएम का पिन बदलते हैं तो इससे खाता व कार्ड को हैक करने की संभावनाएं कम हो जाती है।
- ग्राहक को कार्ड स्वाइप करते वक्त अलर्ट रहना चाहिए। कार्ड आसानी से नहीं जा रहा है तो चेक करे कि वहां कोई डुप्लीकेट डिवाइस तो नहीं। नंबर प्लेट कुछ उखड़ी हुई तो नहीं है। इसके अलावा संदिग्ध कैमरे को भी देखे।
- बैंक अधिकारियों का कहना है कि कोई भी बैंक अपने किसी ग्राहक से कभी भी खाते क्रेडिट व डेबिट कार्ड सहित बैंक से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जानकारी नहीं मांगता। ग्राहक से न ही किसी तरह का पासवर्ड पूछा जाता है, क्योंकि बैंक के पास उपभोक्ता के खाते का पूरा रिकॉर्ड होता।
- लेन-देन ग्राहक की लापरवाही की वजह से हुआ है और इसकी सूचना कामकाजी दिन के भीतर बैंक को देते हैं। इस स्थिति में आप की डाटा कीमती हो जाती है। इसको लेकर आरबीआई ने निर्देश जारी कर रखे है।
पुलिस ऐेसे मामलों की जांच कर रही है। जल्द ही साइबर ठगों पर नकेल कसी जाएगी। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस ने अपराधियों को काबू भी किया है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
नाजनीन भसीन, पुलिस अधीक्षक