केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने एक फिर मसानी बैराज में एम्स का निर्माण का राग अलापा है। उन्होंने शुक्रवार को रामपुरा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मसानी में एम्स के निर्माण की संभावनाओं पर स्टडी की जा सकती है, लेकिन पहले प्रयास है मनेठी में ही एम्स का निर्माण हो। उन्होंने कहा कि मसानी में करीब 17 सौ एकड़ जमीन है जो वन विभाग को ट्रांसफर हो चुकी है। उसमें से ढाई सौ एकड़ जमीन ली जा सकती है। मसानी बैराज में एम्स के निर्माण में नदी के बहाव की कोई दिक्कत नहीं है। उधर मनेठी एम्स संघर्ष समिति के सदस्यों में मसानी बैराज में एम्स के निर्माण की संभावनाओं की स्टडी किए जाने के बयान से नाराजगी जताई है।
वन सलाहकार समिति की नामंजूरी के बाद मचा घमासान
गांव मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण को लेकर वन सलाहकार समिति की नामंजूरी के बाद से नेताओं, ग्रामीणों व अधिकारियों के बीच घमासन मचा हुआ है। इस सबके बीच केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से मसानी बैराज में एम्स की संभावना जताने के बाद एम्स संघर्ष समिति ने भी आंदोलन की रूप रेखा तैयार कर ली। जबकि मनेठी में एम्स के निर्माण के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा ही ठोस रूप से पैरवी की गई थी।
चार अगस्त को ग्रामीण भरेंगे जेल
मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण के लिए 26 जुलाई से पहले एम्स का शिलान्यास नहीं किया गया तो संघर्ष समिति के आह्वान ग्रामीण आंदोलन की शुरूआत करते हुए जेल भरो आंदोलन करेंगे। आंदोलन की कामयाब बनाने के लिए समिति सदस्यों ने ग्रामीणों से जनसंपर्क तेज कर दिया है।
मनेठी में एम्स नहीं तो चुनावों में भुगतेंगे परिणाम
लोकसभा चुनावों से पूर्व मनेठी में एम्स के निर्माण की घोषणा का ही परिणाम था कि बावल विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने एकजुट होकर सरकार का साथ दिया था। लेकिन एम्स के निर्माण में रुकावट के बाद से विधानसभा क्षेत्र के लोगों में गुस्सा है। ऐसे में यदि एम्स को मनेठी की बजाए मसानी या कहीं ओर स्थानांतरित किया जाता है तो अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते है।
सबसे ज्यादा असर बावल विधानसभा पर
भाजपा की टिकट पर पहली बार विधायक बने डॉ. बनवारी लाल राज्य मंत्री हैं। राव इंद्रजीत समर्थक होने के चलते बीते दिनों एक कार्यक्रम में राव डॉ. बनवारी के लिए टिकट की पैरवी करने की बात कह चुके हैं। ऐसे में यदि विधानसभा चुनाव से पहले मनेठी में एम्स का शिलान्यास नहीं हुआ तो इसका सबसे ज्यादा खामियाजा बावल के भाजपा विधायक को झेलना पड़ सकता है।
मनेठी एम्स की नामंजूरी किसी भी सूरत में बरदाश्त नहीं
एम्स के निर्माण के लिए मनेठी सबसे उपयुक्त स्थान है। जमीन भी ग्राम पंचायत की है। ऐसे में रुकावट डालना क्षेत्र के ग्रामीणों की भावना के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। ग्रामीण इसे किसी भी सुरत में बरदाश्त नहीं करेंगे। पहले की भांति ग्रामीण अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
-श्योताज यादव, प्रधान एम्स संघर्ष समिति