रेवाड़ी। धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित हाई-वोल्टेज बिजली लाइन प्रोजेक्ट को लेकर दायर याचिका पर सिविल अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अशीष कुमार मंडल की अदालत ने एमएस लूथरा मेटल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की उस मांग को खारिज कर दिया।
कंपनी ने अपनी जमीन के भीतर बिजली टावर स्थापित करने और लाइन बिछाने पर रोक लगाने की अपील की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना सार्वजनिक हित और बुनियादी ढांचे से जुड़ी है इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता कंपनी ने आरोप लगाया था कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) और उससे जुड़े अधिकारी उसकी निजी जमीन में जबरन टावर खड़ा कर हाई-वोल्टेज लाइन बिछाने का प्रयास कर रहे हैं। कंपनी का कहना था कि पहले से लगा टावर उसकी बाउंड्री के बाहर था लेकिन अब उसे हटाकर भीतर लगाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं डीएचबीवीएन की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि यह परियोजना धारूहेड़ा और रेवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है। उन्हें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 14 व 164 के तहत विद्युत लाइनों के निर्माण व टावर स्थापित करने का अधिकार प्राप्त है। इंडियन टेलीग्राफ 1885 के प्रावधान भी ऐसी परियोजनाओं को कानूनी संरक्षण देते हैं।
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अगस्त 2022 को जारी की गई थी लाइन बिछाने की अधिसूचना
25 मार्च को सुनाए अपने फैसले में अदालत ने कहा कि इस मामले के तथ्यों पर गौर करने पर इस चरण में 16 अगस्त 2022 के हरियाणा सरकारी राजपत्र को देखने से पता चलता है कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड ने धारूहेड़ा और रेवाड़ी में 66 केडब्लयू की हाई-वोल्टेज बिजली लाइन बिछाने की अधिसूचना जारी की थी। न्यायालय का यह मत है कि बिजली लाइन बिछाना बुनियादी ढांचा क्षेत्र के दायरे में आता है जोकि सार्वजनिक महत्व का विषय है। इसलिए निषेधाज्ञा जारी करने से ऐसे बुनियादी ढांचा परियोजना की प्रगति या उसके पूरा होने में बाधा या विलंब उत्पन्न होगा। इसके अतिरिक्त यह निर्विवाद है कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड अधिनियम की धारा 14 के अनुसार एक लाइसेंसधारी है। बताए गए कानूनी प्रावधानों को देखते हुए प्रतिवादी संख्या 4 -6 को अपने काम को पूरा करने के लिए बिना किसी शर्त के अधिकार दिए गए हैं, हालांकि, निजी मालिक (वादी) की संपत्ति में प्रवेश करने वाले अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे प्रोजेक्ट को पूरा करते समय मालिक की संपत्ति को कम से कम नुकसान हो, और ऐसे काम के कारण मालिक की संपत्ति को हुए किसी भी नुकसान के लिए मुआवजा देना होगा।
वादी को कोई अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं अदालत
अदालत ने कहा कि बिजली की लाइन बिछाने का विरोध करने का मालिक के पास कोई अधिकार नहीं है। विधायिका ने इस उद्देश्य को प्राप्त करने में किसी भी तरह की रुकावट की अनुमति नहीं दी है और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 की योजना के तहत जो लाइसेंसधारी को टेलीग्राफ लाइनें बिछाने का अधिकार देता है उसी नियम को बिजली ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने के लिए भी लागू किया है। अदालत वादी के पक्ष में निवारक निषेधाज्ञा के रूप में कोई अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं है।