रेवाड़ी। एचएसवीपी ने सेक्टर तीन स्थित एक दुकान ई-ऑक्शन में बेसमेंट सहित बेचने के लिए बोली लगवाई, लेकिन बाद में कब्जा देते समय बेसमेंट की शर्त हटा दी। इतना ही नहीं विभाग ने बोलीदाता का आवंटन भी रद्द कर दिया। बोली दाता ने जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग की शरण ली। आयोग ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में एचएसवीपी पर एक लाख का जुर्माना लगाया। इसके अतिरिक्त तो वाद खर्च के लिए 11 हजार रुपये शिकायतकर्ता को अतिरिक्त रूप से देने के आदेश दिए गए हैं।
शहर के सेक्टर तीन निवासी प्रवीण शर्मा ने एचएसवीपी की ओर से सेक्टर-3 पार्ट वन में एक दुकान के लिए 16 फरवरी 2022 को ई-ऑक्शन के तहत बोली लगाई थी। दुकान नंबर 40 की बोली के लिए विद बेसमेंट व फर्स्ट फ्लोर बनाने की अनुमति का विज्ञापन एचएसवीपी की ओर से दिया गया था। जिस पर प्रवीण शर्मा ने एक करोड़ 41 हजार 610 रुपये तक की बोली लगाई। बोली सफल रहने पर एचएसवीपी ने दुकान बोलीदाता के नाम अलॉट कर दी। लेकिन बाद में बोलीदाता को पता चला कि दुकान के अलॉटमेंट में बेसमेंट नहीं था। कई बार विभाग के चक्कर लगाने पर यह मालूम हुआ कि बोली लगाने से पूर्व विभाग ने ई-ऑक्शन के दौरान बेसमेंट को अपनी शर्तों से हटा दिया था। इस बारे में कोई भी जानकारी शिकायतकर्ता को नहीं दी गई। इतना ही नहीं ऑनलाइन बोली के समय भी यह शर्त नहीं दर्शाई गई थी। जिसके बाद शिकायतकर्ता प्रवीण शर्मा ने अपने अधिवक्ता अश्विनी कुमार तिवारी की सहायता से जिला उपभोक्ता आयोग में एचएसवीपी के खिलाफ याचिका दायर कर मांग की, कि उसे बेसमेंट सहित दुकान दी जाए। लेकिन विभाग ने उसे दुकान अलॉट नहीं की। शिकायतकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन संजय कुमार खंडूजा व सदस्य डॉ. ऋषि दत्त कौशिक ने पाया कि एचएसवीपी ने गलती मानी है। लेकिन उनकी ओर से यह तर्क दिया गया कि समय रहते उन्होंने अपने विज्ञापन में बोली से पहले बेसमेंट वाली शर्त हटा ली थी, जबकि इस संदर्भ में विभाग कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका। आयोग ने अपने फैसले में लिखा कि इस दुकान के आसपास की जितनी भी दुकानें ई-ऑक्शन द्वारा बेची गई है उनमें बेसमेंट शामिल है। लेकिन केवल शिकायतकर्ता की दुकान में ही बेसमेंट की शर्त को क्यों हटाया गया है यह संदेहास्पद है। जिसके बाद उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता के लिए मानसिक प्रताड़ना एवं परेशानी के लिए विभाग पर 1 लाख रुपये का जुर्माना देने के आदेश दिए। साथ ही आदेश दिया कि शिकायतकर्ता 30 दिन के अंदर अपनी बकाया 75 प्रतिशत राशि नियमों के मुताबिक जमा कराएगा और इस पर एचएसवीपी कोई ब्याज नहीं लेगा।