रेवाड़ी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर जिले के लोगों में खुशी है। साथ ही राम मंदिर आंदोलन में अपना अहम योगदान देने वाले 1990 के आंदोलनकारियों ने मंदिर का निर्माण अपने जीवनकाल का सबसे सुनहरा पल बताया है।
रत्नेश, सदानंद, दुष्यंत, अजय ने बताया कि 15 लोगों का जत्था रेवाड़ी से अयोध्या के लिए निकला था, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल में रहने के बाद जब वापस घर आए तो दोबारा से फिर अयोध्या जाने का मन हुआ। मगर मामला कोर्ट में चला गया था और अयोध्या के हालात को देखते हुए वहां पर जाना सभी लोगों ने मुनासिब नहीं समझा। केस कोर्ट में जाने के बाद फैसले का इंतजार किया जा रहा था। लंबा समय बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं आया। बीच में ऐसा लगा कि जरूर अब फैसला होगा, हमेशा कोर्ट की तरफ से आगे की तारीख दी जाती रही। उनके कई साथी अब इस जीवन को अलविदा कह कर जा चुके हैं, क्योंकि उनकी उम्र काफी हो चुकी थी। आज से यह करीब 33 साल पहले की बात है। लोगों ने बताया कि आज भी पुरानी यादें जिंदा हैं।
मानसिक रूप से हो चुके थे परेशान
पूर्व आंदोलनकारी का भी कहना है कि दोबारा वह जाना तो जरूर चाहते थे, मगर मानसिक रूप से भी वह काफी परेशान थे। कारण यह था कि जो यातनाएं उन्होंने सही उसके बाद दोबारा से जाने के लिए उन्होंने कई बार सोचा। दूसरी तरफ जगह विवादित होने की वजह से भी काफी समस्या थी। इस वजह से दोबारा अयोध्या नहीं गए।
वर्षों पुराना हो रहा सपना पूरा
लोगों ने बताया कि कभी सोचा नहीं था कि राम मंदिर वह अपने जीवनकाल में बनते हुए देख सकेंगे। क्योंकि मामला कोर्ट में जाने के बाद उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे में अब जब राम मंदिर का निर्माण हो रहा है तो वह इस बार वहां पर जरूर जाएंगे। रत्नेश ने बताया कि राम मंदिर का निर्माण होना किसी सपने से कम नहीं है। ऐसा लग रहा है मानों वर्षों पुराना सपना पूरा हो रहा है। आज अगर उनके सभी साथी जीवित होते तो वह भी राम मंदिर जरूर जाते।