नई दिल्ली। स्कूलों के बाद अब उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों को मातृ भाषा के साथ एक भारतीय भाषा की पढ़ाई भी करनी होगी। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर और सामान्य विश्वविद्यालयों में भाषा विषय में पढ़ाई की व्यवस्था बदलने जा रही है।
इसमें छात्रों को मातृ भाषा के साथ एक भारतीय भाषा लेनी होगी। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थान छात्रों को 22 भारतीय भाषाओं में से कोई तीन भाषाओं के विकल्प मिलेंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ भारतीय भाषा समिति (बीबीएस) की पहल पर देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में आगामी सत्र से व्यवस्था बदलने की तैयारी चल रही है।
बीबीएस का मकसद छात्रों, शिक्षकों व कर्मियों की भाषाई स्किल व रोजगार क्षमता को बढ़ाना और अंतर-सांस्कृतिक समझ को मजबूत करना है। योजना के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत राष्ट्रीय एकीकरण, सांस्कृतिक एकता और समावेशी विकास के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देने पर जोर है।
इसमें भारतीय भाषा समिति ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में एक और भारतीय भाषा सीखने की सिफारिश की है। इसका मकसद, छात्रों और शिक्षकों को एक अतिरिक्त भारतीय भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है।