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Rewari News: बाजरा खरीद की जटिल प्रक्रिया ने बढ़ाई किसानों की परेशानी, मंडियों में घंटों कर रहे इंतजार

Sat, 03 Oct 2026 01:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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करतार सिंह, निवासी धानियां - फोटो : udhampur news
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रेवाड़ी। बाजरे की खरीद की जटिल प्रक्रिया के चलते इस बार किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर भूमि सत्यापन, गेट पास, बायोमेट्रिक सत्यापन, एग्री स्टैक आईडी, ट्रैक्टर की नंबर प्लेट और आधार से लिंक मोबाइल पर ओटीपी जैसी प्रक्रियाओं के कारण किसानों को मंडी में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इनमें दिक्कत आने पर किसानों को लौटना पड़ रहा है।
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जिले की रेवाड़ी व कोसली मंडियों में अब तक 713 किसानों को बाजरा बिक्री के लिए गेट पास जारी किए जा चुके हैं। वहीं, 3025.28 मीट्रिक टन बाजरे की आवक दर्ज की गई है। रेवाड़ी व कोसली मंडी में हैफेड और बावल मंडी में वेयरहाउस को खरीद एजेंसी बनाया गया है। तीनों ही मंडियों में किसी भी खरीद एजेंसी का अभी तक खाता भी नहीं खुल पाया है।
किसानों का कहना है कि उपज लेकर मंडी पहुंचने के बाद कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। बायोमेट्रिक कराने के लिए भी किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसानों के आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं होने या ओटीपी संबंधी परेशानी के कारण प्रक्रिया और लंबी हो रही है।
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मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर जिले में कुल 76,594 एकड़ भूमि में अब तक 59,192 एकड़ भूमि का सत्यापन हो पाया है। करीब 17,401 एकड़ भूमि का सत्यापन अभी शेष है। यानी जिले में 77.3 प्रतिशत भूमि का सत्यापन पूरा हुआ है, जबकि 22.7 प्रतिशत भूमि का सत्यापन होना बाकी है। सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण किसानों को उपज बिक्री में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

- उपज बेचने के लिए पहले पोर्टल पर रिकॉर्ड दुरुस्त कराने, फिर गेट पास और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है। कई जगह बायोमेट्रिक और ओटीपी में भी समय लग रहा है। बार-बार मंडी के चक्कर लगाने और लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए कुछ किसान घर या खेत से ही व्यापारियों को बाजरा बेच रहे हैं।- राजविजय तंवर, निवासी रतनथल बास।
- मंडी में बाजरा लेकर आने के बाद बिक्री की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी लंबी महसूस हो रही है। पोर्टल पर जमीन का रिकॉर्ड, गेट पास, बायोमेट्रिक और ओटीपी जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। किसी एक चरण में दिक्कत आने पर किसान को दोबारा आना पड़ता है। छोटे किसान के लिए बार-बार मंडी आना अतिरिक्त खर्च और परेशानी का कारण बन रहा है। इसी वजह से कुछ किसान सीधे व्यापारियों को उपज बेचने को मजबूर हो रहे हैं।- मनोज कुमार, निवासी कोहराड़।

-सरकार ने फसल खरीद की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का प्रयास किया है, लेकिन जमीन पर किसानों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। पोर्टल पर रिकॉर्ड दुरुस्त कराने से लेकर गेट पास और बायोमेट्रिक तक अलग-अलग चरण हैं। मोबाइल पर ओटीपी आने में देरी होने पर भी प्रक्रिया रुक जाती है। किसानों के पास खेत का काम भी रहता है, इसलिए पूरा दिन मंडी में बिताना मुश्किल होता है। प्रक्रिया कम चरणों वाली और आसान होनी चाहिए। - करतार सिंह, निवासी धानियां
-बाजरा मंडी में बेचने के लिए कई कागजी और ऑनलाइन औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा है। पहले पोर्टल पर रिकॉर्ड की जांच और सुधार, फिर गेट पास, बायोमेट्रिक तथा ओटीपी जैसी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट या मोबाइल से जुड़ी समस्या होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। यदि किसी स्तर पर कमी रह जाए तो किसान को दोबारा मंडी आना पड़ता है। - खेमचंद, निवासी भाकली बी

वर्जन
अधिकारियों के अनुसार सरकारी खरीद व्यवस्था में किसान और उसकी भूमि का रिकॉर्ड सत्यापित करने के साथ उपज की वास्तविक आवक दर्ज करना जरूरी है। इसी के तहत पोर्टल सत्यापन, गेट पास और बायोमेट्रिक जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं। किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए मंडी स्तर पर प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाता है।- नरेंद्र कुमार, सचिव मार्केट कमेटी रेवाड़ी।

करतार सिंह, निवासी धानियां- फोटो : udhampur news

करतार सिंह, निवासी धानियां- फोटो : udhampur news

करतार सिंह, निवासी धानियां- फोटो : udhampur news

करतार सिंह, निवासी धानियां- फोटो : udhampur news

करतार सिंह, निवासी धानियां- फोटो : udhampur news

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