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बर्बाद फसल का मुआवजा प्रति एकड़ 35 हजार रुपये की दर से दिया जाए : चढ़ूनी

Sun, 03 Aug 2025 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो : 20रेवाड़ी में रविवार को हुई पंचायत में बीडीपीओ को ज्ञापन सौंपते गुरनाम सिंह व अन्य। संवा - फोटो : जैतीपुर रेलवे स्टेशन पर ओएचई लाइन का काम करते कर्मचारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। हाल ही में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों के एवज में सरकार ने 9000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जो बेहद नाकाफी है। सरकार किसानों को कम से कम 35,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दे तो यह न्यायसंगत माना जाएगा। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के राष्ट्रीय प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने रविवार को अनाज मंडी में आयोजित किसान-मजदूर पंचायत को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
चढ़ूनी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के साथ बार-बार धोखा हो रहा है। अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने वर्ष 2023 में बाजरे के भावांतर योजना को लेकर कहा कि सरकार ने किसानों को उनके हक का उचित दाम नहीं दिया। भावांतर सिर्फ एक छलावा बनकर रह गया है।
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उन्होंने कहा कि खाद और बीज की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी तो संगठन आंदोलन करेगा। उन्होंने अमेरिका की कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि हम अपने देश की कृषि को अमेरिका के एजेंडे पर नहीं चलने देंगे।
कहा कि रेवाड़ी में रबी सीजन में ओले और बारिश से खराब हुई सरसों, गेहूं जैसी फसलों का रकबा करीब 22 हजार एकड़ दिखाया गया है जबकि किसान संगठन इसे 40 हजार एकड़ से अधिक बता रहे हैं।
पूरे हरियाणा में 52 करोड़ 14 लाख रुपये का मुआवजा बांटा जा रहा है, जिसमें रेवाड़ी जिले को सबसे ज्यादा 19.92 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यहां किसानों को औसतन प्रति एकड़ 9 हजार रुपये मिलेंगे।
चढूनी ने कहा कि डीसी से जिला कमेटी मिलेगी। अगर 20 दिन के दौरान प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। ओलावृष्टि के मुआवजे के साथ-साथ किसानों को खाद समय पर उपलब्ध करवाने व बाजरा खरीद की समुचित व्यवस्था के लिए भी कहा गया है। बैठक के बाद किसानों का ज्ञापन लेने के लिए बीडीपीओ धारूहेड़ा पहुंचीं।
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अस्पताल के लिए चल रहे धरने को भी किया संबोधित
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी रामगढ़ भगवानपुर में 200 बेड के अस्पताल को लेकर चल रहे धरने में भी पहुंचे। उन्होेंने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल की मांग जायज है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अस्पतालों के अंदर जो स्थिति है, उसमें कंपनियों का प्रवेश हो गया है। कंपनियां अस्पताल खोल रही हैं। अस्पताल में कोई गुजर जाता है तो उसे 2 रात लिटा कर पैसा ले लिया जाता है। 10 रुपये की दवाई के एक हजार रुपये लिए जाते हैं। हमारी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होेंने कहा कि कई बार यह भी देखा गया है कि एक डाॅक्टर जब क्लीनिक चलाता है तो पास में मेडिकल खुलवा लेता है। दवाई लेने जाओ तो कहते हैं कि यहीं से दवा मिलेगी और यहीं से लेनी भी पड़ेगी। बीमार और मजबूर लोगों को लूटा जा रहा है। बड़े अस्पताल डाॅक्टर को 3 लाख रुपये में रखते हैं, मरीजों का लक्ष्य दिया जाता है। बहुत गड़बड़ी है। इलाज फ्री होना चाहिए। सरकारी अस्पताल में सुविधा होनी चाहिए जो नहीं है। सरकारी अस्पताल में जांच समय से नहीं होती है। इसके लिए लंबी डेट मिलती है।
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