रेवाड़ी। शिक्षा विभाग ने 1 से 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित गृह कार्य देने के निर्देश दिए हैं। गृह कार्य में बच्चों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय अनुभव के माध्यम से सीखने पर जोर दिया गया है। इस दौरान अभिभावक बच्चों को रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान देंगे।
शिक्षा विभाग ने निपुण कार्यक्रम और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुरूप बदलाव करते हुए लेखन और रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर अनुभव आधारित सीखने को प्राथमिकता दी है। तय किया गया है कि बच्चे परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर गृह कार्य करेंगे। नाना-नानी, दादा-दादी और परिवार के वरिष्ठ सदस्य मेंटर की भूमिका निभाएंगे, जो अपने अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल और व्यवहार की सीख देंगे।
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद का मानना है कि इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में पढ़ने-लिखने और गणना जैसे बुनियादी कौशल तो विकसित होंगे ही, साथ ही आंकलन, अनुमान, विश्लेषण, एकीकरण, कहानी कहना व समझना और संवाद कौशल भी मजबूत होंगे। इससे विद्यार्थियों के शब्दकोश का भी विस्तार होगा।
बच्चे अपनी मातृभाषा में गीत, लोकगीत, पहेलियां, कहानियां, किस्से, पारिवारिक परंपराएं, रीति-रिवाज, भोजन और पारंपरिक व्यंजनों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि शीतकालीन अवकाश के दौरान अभिभावक अपने बच्चों को सुबह जल्दी उठने की आदत डालें और मेडिटेशन, ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दें। सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में बच्चों को अवश्य शामिल करवाएं। अपने बच्चे में पौधे लगाने और उनका ख्याल रखने की आदत का विकास करें। सोने के समय अपने बच्चों को पंचतंत्र, तेनालीराम आदि की शिक्षाप्रद कहानी सुनाएं। इसके अतिरिक्त साहित्यिक व धार्मिक कथाएं और कहानियां भी सुनाएं। पर्यावरण संरक्षण के लिए कचरा प्रबंधन के बारे में जानकारी दें। उन्हें अनुशासन के साथ-साथ सही और गलत का अंतर समझाएं। उनमें स्वयं पढ़ने और सीखने की आदत डालें।
वर्जन
एक से 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। इस दौरान विद्यार्थियों को अनुभव आधारित गृहकार्य दिया जाएगा। बच्चों को मोबाइल और रटने की प्रवृत्ति से दूर रखा जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के अभिभावकों की बड़ी भूमिका रहेगी।
-बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।