सालाराही तालाब में पूजा के लिए छोटे तालाब बनाते मजदूर।
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रेवाड़ी। जिलेभर में इस बार पूर्वांचल (यूपी), बिहार, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के 50 हजार लोग छठ पर्व मनाने की तैयारी में जुटे हैं। सामाजिक सद्भाव के मद्देनजर यह पर्व जिला मुख्यालय के अलावा कोसली और धारूहेड़ा कस्बे में भी मनाया जाएगा। दीपावली पर्व के बाद 28 अक्तूबर से यह पर्व शुरू होगा और 31 अक्तूबर तक चलेगा। जिले में आधा दर्जन स्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
शहर के सेक्टर एक स्थित सोलहराही तालाब पर पूर्वांचल सेवा समिति की ओर से बड़ा आयोजन किया जाएगा। इसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। समिति के प्रधान रामधार शर्मा और दिवाकर चौबे ने बताया कि 28 अक्तूबर से हरियाणा में पर्व को मनाने का क्रम शुरू होगा। उस दिन नहाय-खाय परम्परा निभाई जाएगी। महिला एवं पुरुष उस दिन से छठ माता का व्रत रखना शुरू कर देंगे। 29 अक्तूबर को खरना आयोजन होगा, जिसमें इस पर्व से जुड़ी परंपराओं को हर परिवार और सदस्य निभाएगा। 30 अक्तूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 31 अक्तूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि छठ पर्व के इन चार दिनों तक पूर्वांचल के प्रत्येक परिवार में रात में प्रसाद बनाने और निशा पूजा करने का विधान है। 29 अक्तूबर को पकवान ठेकूआ, खस्ता और फलाहार, महिला, पुरुष और बच्चों के लिए नए वस्त्र पहनकर विधिपूर्वक छठ पूजन होगा। 30 अक्तूबर को सूर्य को अर्घ्य देने की परम्परा गाय के दूध से निभाई जाएगी, जो प्रत्येक व्रत रखने वाला पानी में खड़े होकर निभाएगा। 31 अक्तूबर को छठ पर्व के अंतिम दिन अलसुबह करीब 3 बजे सारा परिवार पर्व की तैयारी शुरू कर देगा। छठ पूजन के दौरान दान, सम्मान और शगुन देने की परंपरा भी निभाई जाती है।