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Rewari News: 37 साल बाद भी नहीं अपग्रेड हुआ सीएचसी

Thu, 26 Dec 2024 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो: 21रेवाड़ी। बावल ​स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बावल। कस्बे में 37 साल पहले बनी सीएचसी अभी तक अपग्रेड नहीं हो पाई है। इसके चलते यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सब डिजिवन अस्पताल बनाने की मांग कई बार उच्च अधिकारियों से की जा चुकी है।
बावल क्षेत्र की आबादी पौने तीन लाख है। बावल सीएचसी का शिलान्यास 23 अक्तूबर 1979 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने किया था। लगभग 8 साल बाद 18 मार्च 1987 को नवनिर्मित भवन का उद्घाटन तत्कालीन बंसीलाल ने किया था। 37 साल बीतने के बाद भी सब डिवीजन अस्पताल नहीं बन पाना काफी हैरान करने वाला है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सब डिवीजन अस्पताल बनाने को लेकर प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। वहीं, अगर सब डिवीजन अस्पताल का दर्जा मिल जाता है तो करीब पौने तीन लाख जनता को काफी राहत मिल जाएगी। यह औद्योगिक क्षेत्र है। यहां पर 350 से अधिक निजी कंपनियां हैं, जिसमें हजारों की संख्या में लोग कार्य करते हैं। ऐसे असुविधाओं की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
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कुलदीप, मनोज, योगेश ने बताया कि मौजूदा समय में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर 20 किलोमीटर दूर रेवाड़ी जाना पड़ता है। राजस्थान सीमा के नजदीक होने कारण यहां काफी लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। सुविधा न मिलने के कारण लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। बीते 37 साल में जनसंख्या भी काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में अस्पताल पर बोझ पड़ना भी लाजमी है। अस्पताल अपने वर्तमान स्थिति पर ही खड़ा है। वर्तमान में अस्पताल में कोई भी स्पेशलिस्ट नहीं है। ऑपरेशन, डिलीवरी की सुविधा भी नहीं है। ब्लड चढ़ाने से लेकर अनेक सुविधाओं का अभाव है। 4 साल से फार्मासिस्ट का भी पद खाली है।


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बावल में औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होना काफी जरूरी है। लोगों को काफी परेशानी होती है। 37 वर्ष बीत जाने के बाद भी अपग्रेड नहीं किया गया है, जबकि जनसंख्या दोगुनी हो चुकी है। इस पर जरूर ध्यान देने की जरूरत है।
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राम किशन महलावत

कस्बा औद्योगिक क्षेत्र में लगातार अपनी पहचान बना रहा है। मगर स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़ता जा रहा है। कस्बे में साढ़े 300 से अधिक निजी कंपनियां है। लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर रेवाड़ी जाना पड़ता है। अगर बेहतर व्यवस्था होगी तो इससे काफी मदद मिल जाएगी।
रामसिंह नंबरदार
वर्जन:

पूरे मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि अभी कार्य प्रक्रिया में है। -डॉ. इंद्रजीत, इंचार्ज, सीएचसी बावल।
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