रेवाड़ी। गर्मी का मौसम शुरू होने के पहले ही पानी की समस्या पैदा होने लगी है। जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) नहर सूखी पड़ी है। अभी तक इसमें पानी नहीं छोड़ा गया है। जलघरों में सिर्फ चार दिन का पानी शेष बचा है। ऐसे में शहर की पौने तीन लाख की आबादी को पेयजल संकट से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। लोग प्यास बुझाने के लिए कैंपर का पानी खरीद रहे हैं।
जेएलएन में खूबडू हेड से कब पानी छोड़ा जाएगा, इसको लेकर अधिकारी भी असमंजस में है। उनका कहना है कि शेड्यूल के अनुसार 18 फरवरी को पानी आना था, लेकिन पानी नहीं छोड़ा गया। अगले दो दिन में पानी आएगा या नहीं, इसके बारे में स्पष्ट नहीं बताया जा सकता है। 25 दिन से जनस्वास्थ्य विभाग एक दिन छोड़कर पानी दे रहा है। ऐसे में लोगों पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। 25 जनवरी को नहर में पानी आना बंद हुआ था। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है।
जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चला रहा है। विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेमंत ने बताया कि शहर के लोगों को पानी की कोई दिक्कत नहीं रहे, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। नहर में अभी दो दिन बाद ही पानी पहुंचने की संभावना है। ऐसे में विभाग की लोगों से अपील है कि पानी बर्बाद न करें। पहले खुबड़ू हेड से 17 फरवरी को पानी छोड़ा जाना था लेकिन पानी नहीं छोड़ा गया। यदि सोमवार की रात को वहां से पानी छोड़ा जाता है तो आज की शाम या कल की सुबह रेवाड़ी जेएलएन में पहुंच जाएगा। इसके बाद टैंकों को भरने का काम शुरू किया जाएगा। ऐसा होने पर 22 फरवरी से पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
चार वर्ष से संकट बरकरार
शहर में पेयजल की राशनिंग करीब चार वर्ष से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। अब 2 साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। पिछले माह 25 जनवरी को नहरी में पानी आना बंद हुआ था। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहर वासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके, इसलिए हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है। मंगलवार की शाम तक नहर में पानी आता है तो बुधवार को पुराने शहर को पेयजल सप्लाई की जाएगी।
नहरी पानी पर आधारित है जीवन
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी की सप्लाई होती है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है।
वर्जन:
नहर में पानी छोड़ने के शेड्यूल को बदल दिया गया है। पहले 18 फरवरी को नहर में पानी आना था। सोमवार की रात को खूबड़ू हेड से पानी छोड़े जाने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ दिया जाता है तो बुधवार से शहरवासियों को नियमित पानी की आपूर्ति की जाएगी।-हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।