सत्संग सुनतीं महिलाए। स्रोत : संस्था
बावल। कस्बे में आयोजित सत्संग में बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि संत परमात्मा से जुड़े होते हैं और उनके भीतर आध्यात्मिक शक्ति होती है। संतों की कृपा से कई बार अनहोनी टल सकती है। दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से आने वाले संकट का समय भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी कारण संतों को धरती का सरताज कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि सच्चे संत के सत्संग से मनुष्य की अज्ञानता दूर होती है और उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य की जानकारी मिलती है। प्रभु की दया से ही मनुष्य को सत्संग सुनने का अवसर मिलता है।
बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि जीवात्मा परमात्मा का अंश है और मूल रूप से निर्मल एवं स्वच्छ है। मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार के प्रभाव में व्यक्ति से अच्छे-बुरे कर्म होते हैं। गलत कर्मों के कारण समय के साथ आत्मा पर अज्ञानता और विकारों का प्रभाव बढ़ता जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु महाराज की पावन स्मृति में बावल में मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।
सत्संग सुनतीं महिलाए। स्रोत : संस्था