रेवाड़ी। जिले में कोरोना वायरस से ठीक हुए लोगों के लिए अब ब्लैक फंगस परेशानी का सबब बन गया है। जिले में अभी तक ब्लैक फंगस के नौ संदिग्ध मामले आ चुके हैं। इन मरीजों को झज्जर के गिरावड़ स्थित वर्ल्ड कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस व एसजीटी गुरुग्राम रेफर किया जा रहा है। इसमें दो मामले झज्जर के गिरावड़ स्थित वर्ल्ड कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस में कंफर्म हुए हैं।
वहीं सीएमओ डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि संदिग्ध मरीजों संबंधित अस्पतालों में भेजा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक कंफर्म मामले नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि जिला नागरिक अस्पताल में फंगस से प्रभावित होने वाले लोगों के इलाज के लिए सुविधा नहीं है। ऐसे मरीजों को सरकारी अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार बताया कि लोगों को अधिक अफवाहों की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। अगर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
ब्लैक फंगस में ये रहते हैं लक्षण
डॉ. सर्वजीत थापर ने बताया कि ब्लैक फंगस में सबसे पहले नाक में भारीपन लगेगा व नाक से खून भी आ सकता है। चेहरे पर दर्द रहेगा। चेहरे पर सूजन व आंखों की रोशनी कम हो जाएगी। आंखे बाहर की ओर निकल आएंगी। आंखों का घूमना बंद हो जाएगा और पलकें गिर जाएंगी। अगर मरीज को ब्लैक फंगस है तो उसके मस्तिष्क में संक्रमण हो सकता। ब्लैक फंगस होने के बाद नाक की एंडोस्कोपी करवानी जरूरी होगी। इससे यह पता लग जाएगा कि मरीज की नाक में कौनसी हड्डी में संक्रमण है। इसके अलावा आंख की कॉन्ट्रास्ट एमआरआई करवानी होगी। संक्रमित अंग का पता लगने के बाद सर्जरी के बाद उसको निकालना पड़ेगा।
जरूरी नहीं सभी कोरोना पॉजिटिव को हो ब्लैक फंगस
डॉ. थापर ने बताया कि सभी कोरोना पॉजिटिव को ब्लैक फंगस हो यह जरूरी नहीं है। कोरोना मरीज जो शुगर से प्रभावित है,उनमें लक्षण रहते हैं। साथ ही ऑक्सीजन थेरेपी ली है और वेंटिलेटर पर रहे हैं। इम्युनिटी कमजोर होने से बीमारी अधिक प्रभावित कर रही है। अलावा अपनी शुगर लेवल लगातार जांचते रहें। धूल मिट्टी से भी बचे और इम्युनिटी बढ़ाने वाली खुराक ले।