संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता की अदालत ने पॉक्सो एक्ट के एक मामले में साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
मामला मार्च 2025 का है। जिले के एक व्यक्ति ने एफआईआर में कहा कि वह अपनी दो बेटियों और पत्नी के साथ किराये के मकान में रहता है। वह पत्नी के साथ सुबह 8 बजे काम पर निकल गया। जब वह और उसकी पत्नी काम से लौटी तो घर का दरवाजा खुला मिला। उनकी 17 वर्षीय बेटी लापता थी।
संदेह जताया कि कोई अज्ञात व्यक्ति उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। पीड़िता को अप्रैल 2025 को बरामद किया गया। उसके बयान के आधार पर पॉक्सो की धारा जोड़ी गई थी। अप्रैल में ही आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कहा कि अभियुक्त पर पीड़िता को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। पीड़िता और उसकी मां ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया।
आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि मामले की सुनवाई में पर्याप्त समय लगेगा। अभियुक्त को आगे हिरासत में रखने से कोई सार्थक उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा। इन परिस्थितियों में जमानत देना ही उपयुक्त होगा। कोर्ट ने कहा कि आवेदक को 50 हजार रुपये के जमानत बांड और जमानती प्रस्तुत करने पर जमानत दी जाती है।
अभियुक्त के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि पीड़िता और उसकी मां से पूछताछ की गई। पीड़िता ने शपथ पत्र पर स्पष्ट रूप से कहा कि अभियुक्त ने उसके साथ कभी कोई गलत कार्य नहीं किया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी की ओर से पीड़िता का कोई जन्म रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार लड़की की आयु 17 से 19 वर्ष के बीच पाई गई। इस प्रकार कथित घटना के समय वह बालिग थी और उसके बयान के आधार पर आरोपी के विरुद्ध कोई भी अभियोगात्मक साक्ष्य नहीं है।