संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने पुलिस पर फायरिंग और गैंगस्टर से जुड़े मामले में आरोपी सीहा निवासी परवीन उर्फ बोडिया की नियमित जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। मामला थाना खोल में दर्ज 20 अगस्त 2025 की एफआईआर से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 19 अगस्त 2025 को एसटीएफ गुरुग्राम और पलवल की टीमों को सूचना मिली थी कि रोहित गोदारा गैंग के शूटर नितिन और यशपाल सफेद कार में सवार होकर रेवाड़ी और बिलासपुर क्षेत्र में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना के बाद पुलिस की संयुक्त टीम ने डहीना क्षेत्र के पास नाकाबंदी की।
करीब रात 1 बजे पुलिस ने संदिग्ध गाड़ी को रोकने का प्रयास किया लेकिन आरोपियों ने गाड़ी पीछे मोड़कर भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इस दौरान एसटीएफ पलवल के प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार गोली लगने से घायल हो गए थे। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई भी की लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए। बाद में घायल इंस्पेक्टर को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी परवीन का नाम मूल एफआईआर में नहीं था। उसका नाम सह आरोपी के खुलासे के आधार पर जोड़ा गया। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई बरामदगी नहीं हुई और न ही ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है, जिससे उसकी संलिप्तता साबित हो सके।
यह भी तर्क दिया कि मुख्य गवाह इंस्पेक्टर अनिल कुमार की गवाही में आरोपी परवीन का नाम नहीं आया। इसके अलावा आरोपी और सह आरोपी के परिवारों के बीच रंजिश होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई। बचाव पक्ष ने कहा कि इसी रंजिश के चलते आरोपी का नाम केस में डाला गया है।
सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी घटना के समय गाड़ी में मौजूद था और पुलिस टीम पर फायरिंग में शामिल था। आरोपी के खिलाफ एक अन्य आपराधिक मामला भी दर्ज है और जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। 22 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।