रेवाड़ी। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने के उद्देश्य से संचालित इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। अब विद्यार्थी योजना के तहत 10 अक्तूबर तक आवेदन कर सकेंगे। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर निर्धारित की गई थी। आवेदन कम प्राप्त होने के कारण आवेदन की तिथि गई है।
जिले में अब तक 1100 विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। योजना के तहत विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीक से जुड़े अपने नए विचार और नवाचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
यह राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके साथ ही चयनित विद्यार्थियों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने नवाचार मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित सर्वश्रेष्ठ 60 विद्यार्थियों को राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में कम उम्र से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ उन्हें नए प्रयोग और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है।
पांच नवाचारों का चयन कर पोर्टल पर करना होगा अपलोड
इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। पहले यह योजना छठी से 10वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए सीमित थी। सत्र 2026-27 से 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे स्कूल स्तर पर अधिक विद्यार्थियों को अपने नए विचार और नवाचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। योजना के तहत प्रत्येक स्कूल को अपने स्तर पर अधिकतम पांच बेहतरीन नवाचारों का चयन कर उन्हें निर्धारित प्रारूप में पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड करना अनिवार्य है। अधिकारियों के अनुसार, विद्यार्थियों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने से उनमें समस्या समाधान की क्षमता विकसित होने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी मजबूत होगा।
वर्जन
इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक विद्यार्थियों को मिले, इसके लिए आवेदन की तिथि बढ़ाई गई है। इसमें चयनित विद्यार्थियों को पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी, जिससे उनका उत्साह बढ़ेगा।-रेनू यादव, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, रेवाड़ी।