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Rewari News: प्राचीन सोलहाराही और बड़ा तालाब संरक्षित क्षेत्र घोषित

Sun, 15 Dec 2024 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने शहर में स्थित ऐतिहासिक महत्व के प्राचीन सोलहाराही और बड़ा तालाब को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है। दोनों तालाबों को संरक्षित करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। अब दोनों तालाबों की देखरेख पुरातत्व विभाग करेगा। वर्तमान में दोनों तालाबों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए इनका सुंदरीकरण पर करीब 10 करोड़ रुपये से किया जा रहा है।
प्राचीन सोलहाराही और बड़ा तालाब के सुंदरीकरण का कार्य पिछले वर्ष से चल रहा है। मरम्मत होने के बाद भी सोलहाराही तालाब की दीवारें तीन बार टूट कर गिर चुकी हैं। इसको लेकर सवाल उठे थे। अमर उजाला ने इस मुद्दे पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसको संज्ञान में लेते हुए पुरातत्व विभाग की टीम ने सोलहाराही और बड़ा तालाब के सुंदरीकरण में इस्तेमाल में लाई गई सामग्री के नमूने लिए थे ताकि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के बारे में पता लगाया जा सके। इसके बाद दोनों तालाबों को संरक्षित करने की प्रक्रिया चल रही थी। अब हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने दोनों तालाबों को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया है।
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हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की टीम जब रेवाड़ी में हेरिटेज निरीक्षण पर आई थी तो दिल्ली रोड स्थित ऐतिहासिक छतरियों का भी दौरा किया था। मौजूदा समय में छतरियां बदहाल है। जबकि छतरियों में जो कलाकारी की गई है वह काफी अद्भुत है। फिलहाल इन छतरियों को भी संरक्षित करने की भविष्य में विभाग की तरफ से कोशिश की जाएगी। संवाद

बड़ा तालाब का इतिहास

तेज सरोवर को वर्तमान में बड़ा तालाब नाम से जाना जाता है। रेवाड़ी के राजा राव राम सिंह ने पानी की किल्लत के कारण इस तालाब को बनवाना शुरू किया था, लेकिन उसी समय राजा माधव राव सिंधिया ने रेवाड़ी पर धावा बोल दिया और प्रजा हितैषी राजा राम सिंह शौर्य दिखाते हुए शहीद हो गए थे। इसके बाद तालाब निर्माण कार्य बंद हो गया। रेवाड़ी निवासी जब पानी की कमी से तंग होने लगे तो एक और राजा राव तेज सिंह ने अपने शासनकाल में तालाब निर्माण के रुके कार्य को वर्ष 1772 में शुरू करवाया जो 1776 में तैयार हुआ। इस तालाब की निर्माण कला और कारीगरी अद्भुत है। इसमें गऊ घाट, इमली घाट, प्राचीन हनुमान मंदिर व शिव मंदिर प्रतिष्ठित हैं। राजा राव तेज सिंह द्वारा इस तालाब को पूरा करवाने के कारण ही इसका नाम तेज सरोवर पड़ गया।

सोलहाराही तालाब का इतिहास

सोलहाराही तालाब शहर के सेक्टर में स्थित प्राचीनतम तालाब है। बुजुर्ग बताते हैं कि 17वीं व 18वीं सदी के मुगल साम्राज्य की दास्तान का मूक गवाह रहा यह तालाब जनता ने सामूहिक प्रयासों से चंदा इकट्ठा करके बनवाया था। समाजसेवी गंगाराम भगत की देखरेख में निर्माण कार्य हुआ था। उस समय सोलह मार्ग यहां आकर मिलते थे, इसलिए इसका नाम सोलह राही पड़ गया। शहर का पानी खारा था, इसलिए पहले लोग सोलह राही स्थित कुओं से पेयजल लाते थे। कुछ दंत कथाओं के अनुसार, रुद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण कराया था। 16 रास्तों के मिलान पर ढलान में स्थापित इस सरोवर को सोलह राही से ही जाना जाता है।

दोनों तालाब जेएलएन नहर से जोड़े जाएंगे

दोनों तालाबों को जेएनएन नहर से कनेक्ट किया जाएगा। इसके लिए जेएलएन नहर से लेकर इन दोनों तालाबों तक करीब 7.4 किमी. लंबी लाइन बिछाई जाएगी। जो गढ़ी बोलनी रोड के साथ से होते हुए राजेश पायलट चौक, आईओसी चौक से राजीव गांधी चौक होते हुए तालाब तक बिछेगी।पाइप लाइन बिछाने के लिए 3.81 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सिंचाई विभाग की कंस्ट्रक्शन विंग की ओर से दोनों तालाबों में पानी से भरने का कार्य किया जाएगा। इन तालाबों के किनारे लाइट और फव्वारे लगाकर आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा।

तालाबों में भविष्य में नाव चलाने की है योजना

मौजूदा समय में बड़ा तालाब और सेक्टर-1 स्थित सोलहराही सरोवर के जीर्णोद्धार का कार्य जारी है। दोनों तालाबों में बने घाट, बावड़ियां व सीढ़ियों को संवारा जा रहा है। इन धरोहर को पुराने अस्तित्व में लौटाने के लिए यह कार्य अगले साल पूरा होने की उम्मीद है। पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए इन तालाबों में भविष्य में नाव भी चलाई जा सकती है, क्योंकि इन सरोवरों की छठा देखते ही बनती है। प्राचीन होने के साथ ही इनकी बनावट भी बेहतर है। अगर पर्यटन के रूप में विकसित किया जाता है तो इससे जिले को आर्थिक मुनाफा भी होगा। दिल्ली-जयपुर हाईवे के निकट होने के कारण यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
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वर्जन :

प्राचीन सोलहाराही और बड़ा तालाब को पुरातत्व व संग्रहालय विभाग ने संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है। जल्द ही इस जानकारी ऑनलाइन बेवसाइट पर चढ़ा दी जाएगी। पहले इनकी देखरेख पीडब्ल्यूडी विभाग कर रहा था। पिछले दिनों पुरातत्व विभाग की टीम ने दोनों तालाबों का निरीक्षण किया था। विभाग की ओर से 100 वर्ष से अधिक प्राचीन धरोहरों को संरक्षित किया जाता है।-विनीत, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग।
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