बावल। सरसों फसल के अच्छे भाव व लगातार बढ़ते हुए क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में सरसों मेले का आयोजन किया गया।
इसमें जिले व आसपास के इलाके के 800 किसानों ने भाग लिया, जिनमें से 50% महिला किसान रही। लगभग 50 प्रगतिशील किसानों, महिलाओं तथा प्रश्नोत्तरी में विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस मेले का उद्देश्य सरसों की खेती के प्रति किसानों में जागरूकता, तकनीकी सहायता, समस्याओं के निदान, दक्षिणी हरियाणा का सरसों के क्षेत्र तथा पैदावार में योगदान को और बढ़ाना तथा देश में सरसों के तेल का आयात से विदेशों में जाने वाले पैसे को रोकना था।
वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करने के लिए चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने सबसे पहले जिले के किसानों को कठोर परिश्रम व अथक मेहनत से सरसों का क्षेत्रफल, पैदावार व उनकी खाद्य उत्पादन में भागीदारी के लिए बधाई दी। रेवाड़ी जिले का किसान रेतीली व कम उपजाऊ जमीन से भी सोना निकल रहा है। यहां का जलवायु, मिट्टी तथा पानी खराब होने के बावजूद भी यहां के किसानों ने फसलों की उत्पादकता उच्च बरकरार रखी है और कुछ फसलों में जैसे बाजरा और सरसों में देश भर में जिला प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उच्च स्थानों पर रहा है।
इसके लिए इस क्षेत्र के किसानों तथा यहां पर कार्यरत वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं। यह क्षेत्र दिल्ली एनसीआर के निकट होने की वजह से सब्जी, बागवानी, जैविक खेती से अधिक लाभ कमाया जा सकता है। मेले में कृषि प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें विभिन्न कंपनियों के अलावा प्रगतिशील महिलाओं व किसानों ने भी स्टाल लगाकर अपनी कार्यों के बारे में अन्य लोगों को अवगत करवाया व विभिन्न प्रोडक्ट्स खुद बनाकर बेचे।
प्रयोगशालाओं का नवीनीकरण करके विश्व स्तरीय बनाया जा रहा
बावल के क्षेत्रीय निदेशक डा. धर्मबीर यादव ने बताया कि किसानों को बेर, अमरुद, बेलगिरी, फालसा, आवंला, करोंदा, नींबूआदि फलदार पौधे व सब्जियों का बीज भी उपलब्ध करवाया जाएगा। किसानों के खेतों पर उनके साथ ट्रायल लगाकर उनको उत्तम जानकारी से अवगत करवाया जाएगा व क्षेत्र की समस्याओं के मद्देनजर नई परियोजनाएं बनाई जा रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को इनका फायदा होगा। प्रयोगशालाओं का नवीनीकरण करके विश्व स्तरीय बनाया जा रहा है।