बंदर को पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा। संवाद
कोसली। शहर और आसपास की कॉलोनियों और गांवों में लंबे समय से बंदरों के उत्पात से परेशान लोगों को अब राहत मिलने लगी है। 28 अप्रैल को अमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और बंदर पकड़ो अभियान शुरू कर दिया गया है।
विभिन्न क्षेत्रों में टीम बंदरों को पकड़ रही है। कई स्थानों पर पिंजड़े भी लगाए गए हैं। कोसली और आसपास के गांवों में हालात इतने खराब हो चुके थे कि बच्चों और महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया था। गांव भडंगी में अकेले एक महीने के भीतर कई महिलाओं और बच्चों को बंदरों ने काट लिया। एक घटना में बंदरों से बचने के प्रयास में 10 वर्षीय बच्चे ने छत से छलांग लगा दी जिससे उसका पैर टूट गया।
बंदरों का आतंक रेलवे स्टेशन पर भी देखने को मिल रहा है। कोसली रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर बंदरों के झुंड बैठे रहते थे जो यात्रियों का सामान छीनने और हमला करने की घटनाओं को अंजाम देते थे। लोगों का कहना है कि अभी अभियान को और तेज करने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र को पूरी तरह बंदरों के आतंक से मुक्त कराया जा सके।
बंदर को पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा। संवाद