संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में पंचायत के भूखंडों और तालाबों में मछली पालन किया जाएगा। पंचायत राज विभाग ने जिले के 400 तालाबों और खाली भूखंडों को पट्टे पर देकर मछली पालन का केंद्र बनाने का निर्णय लिया है। खाली भूखंडों को किसानों को पट्टे पर दिया जाएगा।
जिला विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से तैयार योजना के तहत इच्छुक निजी व्यक्ति और स्वयं सहायता समूह इन जमीनों पर नियमानुसार तालाब बनाकर मछली पालन कर सकेंगे। इससे लोगों व स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की आय तो बढ़ेगी ही साथ ही विभाग को भी राजस्व हासिल होगा।
सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग भी प्रदान करेगी। इससे न सिर्फ लोगों की आय बढ़ेगी बल्कि पंचायती जमीनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। हरियाणा सरकार ने भूजल रिचार्ज के लिए गंदे जोहड़ों और तालाबों के रेनोवेशन पर जोर दिया है। इन्हें अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिले के 70 से अधिक तालाबों पर 50 लाख रुपये तक खर्च किया जा रहा है।
हालांकि इनकी देखरेख के लिए कोई तय संस्था नहीं होने से भविष्य में इनकी स्थिति फिर से खराब हो सकती है। इसलिए अब इन्हें भी मछली पालन के लिए पट्टे पर देने की योजना बनाई गई है।
जिले के लगभग 400 तालाबों को इस योजना में शामिल किया जा रहा है। यह कदम दोहरा लाभ देगा एक ओर जहां तालाबों की स्वच्छता बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर पट्टे पर देने से सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा।
खारे पानी वाले तालाबों में भी मछली पालन का स्कोप बन रहा है, जिसे देखते हुए झींगा पालन की प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है। रेवाड़ी की कई पंचायतों में तालाबों का पानी खारा है, जो सामान्य मछली प्रजातियों के लिए उपयुक्त नहीं होता। लेकिन विभाग ने इसे अवसर में बदलते हुए झींगा पालन को बढ़ावा देने की तैयारी की है, क्योंकि यह खारे पानी में भी अच्छी तरह पनपता है।
वर्जन
पंचायती जमीनों और तालाबों को मछली पालन के लिए पट्टे पर दिया जाएगा। मत्स्य विभाग का भी इस योजना में सहयोग लिया जाएगा, जिससे न केवल लोगों की आय बढ़ेगी साथ ही विभाग को भी इससे राजस्व हासिल होगा।
- नरेंद्र सारवान, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, रेवाड़ी।