अधिकारी और विधायक से मिलता है केवल आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
कोसली।
कोसली-कनीना मार्ग पर बसों की कमी की वजह से करीब दस गांवों की 200 बेटियों की पढ़ाई प्रभावित होने के मामले में क्षेत्र के संगठनों ने एकजुट होना शुरू कर दिया है। इस मामले में गांवों के पंचायत प्रतिनिधि भी सामने आने लगे हैं। इसके अलावा अन्य संगठनों ने बेटियों के पक्ष में इस मामले में सहभागिता जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि बेटियां ठंड में ठिठुरती हुई विभिन्न शिक्षण संस्थानों को निकलती हैं। शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने और वापस लौटने तक परिजन चिंतित रहते हैं। जो भी साधन बच्चों को मिलता है, उसी में लटक कर शिक्षण संस्थानों तक पहुंचती हैं। आने जाने की दिक्कत के कारण कई बेटियाें के परिजन उनको घर पर बैठाने पर विचार करने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब जल्द सरकार, प्रशासन और विभाग ने उनकी मांगों पर अमल नहीं किया तो ग्रामीण सड़कों पर उतर कर कोसली-कनीना मार्ग जाम कर देंगे। इस बारे में प्रशासन और विधायक से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है।
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परिवहन मंत्री को लिखा पत्र
अमर उजाला के इस अभियान के बाद अब ग्रामीण उत्थान-भारत निर्माण संगठन ने परिवहन मंत्री को पत्र खिलकर इस मार्ग पर बसों के शीघ्र संचालन की मांग की है। संगठन के संयोजक डॉ. टीसी राव ने बताया कि कोसली, कनीना और नाहड़ में काफी स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान हैं। लेकिन इस कोसली-कनीना मार्ग पर बस सेवा बहुत कम है। पहले जो बसें चलती थी उन्हें भी बंद कर दिया गया। संगठन ने अमर उजाला की खबरों का भी हवाला दिया।
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क्षेत्र के जनप्रतिनिधि
छात्राओं को यातायात के साधनों की सख्त जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि वह कॉलेज समय पर बसों की व्यवस्था करे। - ओमप्रकाश, ब्लॉक समिति सदस्य
कोसली-कनीना मार्ग पर यातायात के साधन कम हैं। इससे छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। अगर शीघ्र ही कोई व्यवस्था नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा। - प्रदीप शेखावत, सरपंच, नाहड़
प्रशासन को बार बार कालेज समय पर बसों की व्यवस्था करने की गुहार लगाई जा चुकी है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। - हरिओम ठेकेदार, सरपंच, भांकली
एक ओर सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। वहीं दूसरी ओर सरकार लड़कियों के लिए यातायात के साधनों तक उपलब्ध नहीं करवा सकती। - केपी यादव, संरक्षक, एकता मंच
सरकार केवल बेटी पढ़ाने का नारा दे रही है। असल मायने में यह काफी दूर है। अभी बेटियों को पढ़ाई के लिए जाने के लिए यातायात के साधन तक उपलब्ध नहीं हैं। -राजेंद्र यादव, प्रधान, नाहड़ चौबीसी