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‘जीएम अंकल, प्लीज एक सुबह हमारे साथ करें सफर’

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‘जीएम अंकल, प्लीज एक सुबह हमारे साथ करें सफर’
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अमर उजाला ब्यूरो
कोसली। रोडवेज बस का पास तो बना लेते हैं लेकिन समय पर बस ही नहीं चलती तो पास का क्या करें। कड़ाके की सर्दी, बरसात, गर्मी में शिक्षा के लिए लटकर कर सफर तय करती हैं। गवर्नमेंट महिला कॉलेज नाहड़ की प्रथम वर्ष की छात्रा रिंकू का कहना है कि रोडवेज के जीएम अंकल, केवल एक दिन सुबह का सफर हमारे साथ लटक कर करेंगे तो हमें भी अच्छा लगेगा। हम आपको अपनी परेशानी बता नहीं सकतीं लेकिन आपको अहसास हो जाएगा कि क्षेत्र की बच्चियां शिक्षण संस्थानों तक कैसे पहुंचती हैं। डीएवी महिला महाविद्यालय कोसली की प्रथम वर्ष की छात्रा सुनीता टोमना का कहना है कि एक तरफ सरकार लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दे रही है दूसरी तरफ व्यवस्था आड़े आ रही है। अब तो परिवार वाले भी बच्चियों को शिक्षण संस्थान भेजा जाय की नहीं इस बारे में सोचने लगे हैं। स्थानीय विधायक को भी हमारी समस्या की तरफ ध्यान देना चाहिए।
परिवहन की समस्या से परेशान कोसली-कनीना मार्ग की दस गांवों की करीब 200 छात्राओं के अभिभावक उनकी पढ़ाई जारी रखने के मामले में हमेशा चिंतित रहते हैं। परिजनों का कहना है कि उनकी बच्चियां कॉलेजों में पढ़ने के लिए कनीना, नाहड़ और कोसली जाती हैं। आपस में इनकी दूरी करीब 25 किलोमीटर है। इस रास्ते में करीब 424 एकड़ में वन क्षेत्र भी फैला है। ऐसे में बच्चियों को अकेले वाहन लेकर भी नहीं छोड़ा जा सकता। लटककर शिक्षा का सफर कब तक पूरी करेंगी। कई बार असामाजिक प्रवृति के लोग उनको नुकसान पहुंचा जाते हैं। ऐसे में छात्राओं का अपने वाहनों से जाना तो और भी अधिक खतरनाक है।
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चौपालों पर होने लगी है चर्चा
कोसली-कनीना सड़क मार्ग पर बस चलाने की मांग को लेकर ग्रामीण भी लामबंद होने लगे हैं। अब गांवों की चौपालों में इस मामले में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ग्रामीण अब किसी भी स्थिति में इस मार्ग पर बसें चलवाना चाहते हैं। उनका कहना है कि गत वर्ष भी छात्राओं ने जाम लगाकर बसें चलवाने की मांग की थी। उस समय प्रशासन ने शीघ्र बसें चलवाने का आश्वासन दिया था लेकिन वह आश्वासन केवल आश्वासन तक ही सीमित रहा। नाहड़ का सरकारी कॉलेज 40 साल पुराना है। कोसली-कनीना मार्ग पर पड़ने वाले ग्रामीण हर साल इस मार्ग पर बसें चलाने की मांग करते हैं। उनकी मांग पूरी नहीं हुई। छात्र रोडवेज के पास तो बनवा लेते हैं, लेकिन बसें चलने से वह खराब हो जाते हैं।
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ग्रामीण बोले, छूट रही है बेटियों की पढ़ाई
झाल के रमेश का कहना है कि कोसली-कनीना सड़क मार्ग पर शुरू से ही बसों की समस्याएं रही है। यहां बसें चलाना बहुत जरूरी है। बच्चों और बूढ़ों को भी बहुत परेशानी होती है। भांकली के धर्म सिंह का कहना है कि बेटियों की पढ़ाई छूट रही है। जब साधन ही नहीं होंगे तो आखिरकार बेटियां पढ़ाई के लिए कैसे जाएंगी। इसके लिए शीघ्र ही कुछ करना चाहिए। लूला अहीर के जयवीर का कहना है कि एक तरफ सरकार बेटियों को उत्साहित कर रही है, दूसरी तरफ बेटियां पढ़ाई के लिए लटक लटक कर जा रहीं हैं। ऐसे में कैसे पढ़ाई होगी। गुर्जरवास के बिजेंद्र का कहना है कि कई बार प्रशासन से इस मार्ग पर बसें चलाने की मांग की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अब तो प्रशासन को इस बारे में सोचना चाहिए।
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