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सड़क हादसों में 148 दिनों में 106 लोगों की गईं जिदंगी, 224 पर मुकदमे दर्ज

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जिले से गुजर रहे तीनों हाईवे (दिल्ली-जयपुर, रेवाड़ी-रोहतक, रेवाड़ी-नारनौल) पर वाहनों की रफ्तार ने मौत का आंकड़ा बढ़ा दिया है। वर्ष 2022 के 148 दिन ही बीते हैं और सड़क हादसों में 106 लोगों की जिंदगी जा चुकी है। मरने वालों का यह आंकड़ा डरावना है। वहीं जिला पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इस साल 224 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए है।
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बता दें कि 17 मई को दिल्ली-जयपुर हाईवे पर क्रूजर वैन और ट्रक के बीच हुए हादसे में पल भर में एक ही परिवार के पांच लोग मौत के मुंह में समा गए। इससे कुछ ही दिन पहले हुडा बाईपास पर दो मोटरसाइकिलों की टक्कर में तीन नवयुवकों की मौत हुई थी। हर साल सड़क हादसों में 200 से अधिक लोगों की मौत होती है। इसके बावजूद सबक नहीं लिया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर है ब्लैक स्पॉट
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या (एनएच) 11 बन कर तैयार हो चुका है और वाहन सरपट दौड़ने लगे है। एनएच-11 पर गांव खोरी-गोविंदपुरी फ्लाइओवर के पास, माजरा मोड़, पाडला कट मुख्य दुर्घटना के स्पॉट बने हुए है। गांव खोरी-गोविंदपुरी फ्लाई ओवर के निकट आए दिन हादसे हो रहे हैं।
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एनएच-48 के ब्लैक स्पॉट
जिले से तीन हाईवे गुजर रहे है। इनमें दिल्ली-जयपुर हाईवे (एनएच-48) सबसे पुराना है और यहां पर दर्जनों ऐसे स्पाट है जहां अकसर हादसे होते रहते हैं। जयसिंहपुर खेड़ा बॉर्डर से लेकर कापड़ीवास बॉर्डर तक करीब 45 किमी. हाईवे का एरिया जिला की सीमा में से गुजरता है। दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर कापड़ीवास चौक, बणीपुर चौक, ओढ़ी कट, जयसिंहपुर खेड़ा, संगवाड़ी, असाही पुल, भूड़ला, साहबी पुल व साबन चौक शामिल है। ये ऐसे प्वाइंट है जहां पर अक्सर हादसे होते हैं। बणीपुर चौक पर आए दिन हादसे सामने आ रहे है। बनीपुर चौक पर फ्लाइओवर बनाने के लिए भी मंजूरी मिल चुकी है। इस चौक पर क्रॉसिंग को दो साल से बंद किया हुआ है, इसके बावजूद वाहन चालक डिवाइडर के ऊपर से मोटरसाइकिल निकालते हैं। पैदल यात्री भी जान खतरे में डाल कर हाईवे पार करते है। कापड़ीवास से भिवाड़ी की तरफ जाने वाला टर्न भी बड़ा ब्लैक स्पाट है। अन्य स्थानों पर इसी तरह अवैध कट सहित संपर्क सड़कें मिल रही है जो कि हादसों का प्रमुख केंद्र है।
एनएच-352 के ब्लैक स्पाट
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-352 (रेवाड़ी-रोहतक हाईवे) पर गांव बीकानेर, गांव रोहड़ाई मोड़, गुरावड़ा और पाल्हावास बड़े ब्लैक स्पॉट है। गांवों की ओर से हाईवे पर मिलने वाले संपर्क मार्गों पर भी सड़क लए कार्य करने की जरूरत है।
इस वर्ष हुए हादसे
पुलिस के जागरूकता अभियानों के प्रयासों के बावजूद वर्ष 2022 में भी सड़क हादसे कम नहीं हो रहे है। वाहन चालक सड़क पर नियमों का पालन नहीं कर रहे है जिसके परिणाम हादसों के रूप में सामने आ रहे है। इस वर्ष जनवरी से मई माह तक जिले में 210 सड़क हादसों में 106 लोगों की मौत हुई है जबकि 183 लोग घायल हुए है।
18 से 40 आयुवर्ग के लोगों पर सर्वाधिक भारी रहे सड़क हादसे
सड़क हादसों में मरने वाले 106 लोगों में से 70 फीसदी 18 से 40 आयुवर्ग के नौजवान रहे हैं। यानी युवाओं पर मौत का कहर ज्यादा टूटा है।
18 से 40 वर्ष आयु: 70 प्रतिशत
40 से 60 वर्ष आयु: 20 प्रतिशत
अन्य आयु वर्ग: 10 प्रतिशत
दोपहिया वाहन चालकों की गई ज्यादा जान
सड़क हादसों का रिकार्ड खंगालने पर सामने आया है कि सड़क हादसों में दोपहिया वाहन चालकों की जान ज्यादा गई है। जिन लोगों की इस साल सड़क हादसों में मौत हुई है उनमें से 60 फीसदी दोपहिया वाहन पर सवार थे। वहीं 30 फीसदी मृतक चौपहिया वाहन वाले रहे। वहीं पैदल वाले 10 प्रतिशत रहे
यातायात नियमों के पालन के लिए जिला पुलिस की तरफ से समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी की जाती है। स्वयं की जागरूकता और नियमों के पालन से ही हादसों में कमी आ सकती है। चालान से बचने के लिए नहीं, स्वयं और अन्य जिंदगियों को बचाने के लिए नियमों का पालन करें।
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-बहादुर सिंह, यातायात प्रभारी।
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