उत्तर भारत की 40 से अधिक खापों ने गांव कंडेला में महापंचायत कर हरियाणा सरकार से कन्या भ्रूण हत्या रोकने में सहयोग मांगा।
खाप चौधरियों ने उदाहरण देते हुए कहा कि लगभग सवा साल पहले जींद के ही गांव बीबीपुर में खाप पंचायतों की महापंचायत हुई थी, जिसके बाद प्रदेश में बेटी को लेकर लोगों की सोच बदली है।
दिल्ली से पहुंचे एक चौधरी ने तो बीबीपुर के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इस गांव में महिला-पुरुष अनुपात बढ़ा है।
बुधवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे सरकारी स्कू ल में ‘बेटी बचाओ’ विषय पर महापंचायत शुरू हुई। महापंचायत का आयोजन कंडेला खाप और कंडेला ग्राम पंचायत ने संयुक्त रूप से किया।
महापंचायत में जींद प्रशासन की ओर से अतिरिक्त उपायुक्त जयबीर आर्य मौजूद रहे। उन्होंने खाप चौधरियों को आश्वासन दिया कि प्रशासन की तरफ से कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए पूरा सहयोग मिलेगा। महापंचायत की अध्यक्षता कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने की।
पालम दिल्ली 360 खाप के प्रधान रामकरण सोलंकी ने कहा कि जब तक हरियाणा सरकार की तरफ से खापों को कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक यह जघन्य अपराध नहीं थमेगा।
उन्होंने बताया कि पिछले साल बीबीपुर गांव में महापंचायत कर सरकार से मांग की गई थी कि कन्या भ्रूण हत्या में शामिल लोगों पर धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया जाए, लेकिन सरकार ने आज तक ऐसा कानून नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि यह अपराध न तो अकेले खाप रोक सकती है और न ही सरकार।
महापंचायत में तीन प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार के सहयोग मांगा गया।
जिसमें कानून बनाकर 302 के तहत मामला दर्ज हो, हिंदू विवाह अधिनियम 1955 में संशोधन और तीसरे प्रस्ताव में ऑनर किलिंग की घटनाओं में खाप पंचायतों के नाम शामिल करने पर खाप चौधरियों ने कड़ा ऐतराज जताया है।
चौधरियों ने कहा कि खाप पंचायतों की किसी भी मामले को सहन करने की हद होती है। बार-बार खापों का नाम ऑनर किलिंग में जोड़ा जा रहा है, जोकि खाप पंचायतों की बेइज्जती है।
मान खाप के प्रधान ओमप्रकाश मान ने तो यहां तक कहा कि अब खापें इस बारे में और सहन नहीं करेंगी।
कानून का भय ही अपराध कम करता है
जींद। सर्वजातीय सर्वखाप हरियाणा के प्रधान नफेसिंह नैन ने कहा कि जब तक कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सख्त कानूनों का अभाव रहेगा, तब तक यह अपराध नहीं रुकेगा।
उन्होंने कहा कि कानून का भय ही अपराधों को कम करता है। कोख में बेटियों को मारा जा रहा है और सरकार कुछ न करे तो समाज में यही संदेश जाएगा कि सरकार मौन होकर इसका समर्थन कर रही है।
उन्हाेंने कहा कि सरकार के पास इस अपराध को रोकने के लिए लंबा चौड़ा सिस्टम होता है, लेकिन सरकार के अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं है।
सर्वजातीय सर्वखाप हरियाणा महिला की प्रधान डॉ. संतोष दहिया ने हरियाणा सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि धारा 302के तहत मामला दर्ज करने के लिए क्या किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं किया। केवल कागजों में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रयास स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे हैं। दहिया ने कहा कि ऐसे कागजी प्रयासों से परिणाम भी कागजी ही आएंगे।
बराह कलां तपा के प्रधान कुलदीप ढांडा ने कहा कि खापों को सरकार अपेक्षित सहयोग चाहिए। तब देखना परिणाम कैसे आते हैं।
उन्होंने कहा कि खापों ने ही सामाजिक उत्थान के कार्य किए हैं। कन्या भ्रूण हत्या गंभीर समस्या है। इसका निदान सभी मिल बैठकर करना है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसको लेकर लोगों को अपना मन बदलना होगा।
ग्राम पंचायत बीबीपुर के सरपंच सुनील जागलान ने कहा कि खाप पंचायतों के सहयोग के कारण ही पूरे जींद जिले में लोगों की सोच बेटियों के लिए बदली है।
उन्होंने दावा कि कोई सरकारी या गैर सरकारी एजेंसी उनके गांव बीबीपुर में आकर पिछले सात आठ महीने में बढ़े महिला-पुरुष के अनुपात का विश्लेषण करे। फिर सभी को यह मालूम हो जाएगा कि बीबीपुर की अब स्थिति क्या है और पहले क्या थी।
महापंचायत में शामिल खाप
कंडेला, मिर्चपुर बाहरा, बिनैण, हाट खाप, खाप 72, महम चौबीसी, खांडा बाहरा, रेढू, मान, खेड़ा खाप, सतरौल,सांगवान, दलाल समेत 41 खापों के प्रतिनिधि महापंचायत में मौजूद रहे।
कन्या भ्रूण हत्या दंडनीय अपराध
अतिरिक्त उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या सामाजिक बुराई के साथ दंडनीय अपराध भी है।
इसे जड़ से खत्म करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सेमिनार कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
वे बुधवार को गंाव कंडेला में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए आयोजित खाप महापंचायत संकल्प सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि कंडेला खाप ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए अच्छी पहल की है। इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने से प्रशासन को भी सहयोग मिलेगा।
उन्हाेंने कहा कि प्रशासन की ओर से प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम के अंतर्गत जो व्यक्ति कन्या भ्रूण हत्या करने में शामिल पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
एडीसी ने कहा कि आंगनबाड़ी और आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं की मासिक प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा कर रही हैं।
इसे जड़ से समाप्त करने के लिए स्वयं सेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन और गैर-सरकारी संगठन भी प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
इसे खत्म करने के लिए शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार बहुत जरूरी है। उन्हाेंने लोगों का आह्वान किया कि वे दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे पर्यावरण को संतुलित करने के लिए पौधरोपण करें।