हरियाणा में कई दिनों से राज्य स्तरीय खेलों में भाग लेने के लिए कड़ी तैयारी कर रही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मिर्जापुर बाछौद की छात्राओं को अचानक प्रतियोगिता में ले जाने से इंकार कर दिया गया।
इससे नाराज अभिभावकों और विद्यार्थियों ने मंगलवार सुबह सात बजे विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। गुस्साए अभिभावकों और विद्यार्थियों ने करीब दो घंटे तक शिक्षकों, छात्रों को स्कूल में नहीं घुसने दिया। सूचना पर डीईओ वंदना गुप्ता मौके पर पहुंची।
उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और छात्राओं को मौके पर ही प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए करनाल रवाना कर मामला निपटाया।
तालाबंदी करने वाले अभिभावकों का नेतृत्व कर रही गांव की सरपंच कृष्णा देवी ने बताया कि स्कूल में कार्यरत डीपीई की लापरवाही के कारण बच्चों को राज्य स्तरीय खेलों में भाग लेने से वंचित रखा जा रहा है।
अभिभावक ऐसा कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रशासन ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मिर्जापुर बाछौद की बारह सदस्यीय टीम का 17 सितंबर को करनाल में होने वाले राज्य स्तरीय खेलों के लिए चयन किया था। चयन के बाद संबंधित शिक्षक इस टीम को लगातार तैयारी भी करवा रहे थे।
16 सितंबर को ढाई बजे अचानक स्कूल प्रशासन ने खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए करनाल ले जाने से इंकार कर दिया। खिलाड़ियों ने घर पहुंच कर इसकी जानकारी अभिभावकों और ग्राम सरपंच को दी।
ग्राम सरपंच ने इस बारे ग्रामीणों से बात कर स्कूल पर ताला लगाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग को चेतावनी दी कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची डीईओ से बच्चों को प्रतियोगिता में ले जाने से इंकार करने वाले कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कराने की मांग की।
डीईओ वंदना गुप्ता का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने छात्राओं को बगैर अभिभावकों के प्रतियोगिता में ले जाने से इंकार किया गया था। दूसरे शहर में केवल शिक्षक के साथ छात्राओं को भेजना सामाजिक मान-मर्यादा के विपरीत है। अभिभावक छात्राओं के साथ रहें तो उन्हें प्रतियोगिता में भेजने से कोई ऐतराज नहीं है।