पानीपत। काव्य गाष्ठी का हुआ आयोजन।
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पानीपत। अंकन साहित्यिक मंच की मासिक काव्य गोष्ठी आर्य पीजी कॉलेज में हुई। इसकी अध्यक्षता पानीपत के वरिष्ठ कवि और साहित्यकार हरगोविंद झांब कमल ने की। जिले के मशहूर शायर इकबाल पानीपती मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथि पानीपत के प्रसिद्ध शायर सिराज पैकर पानीपती रहे।
इस दौरान केसर कमल शर्मा ने पढ़ा- टेंशनें तो बेमौसमी फूल हैं यारों, एक दिन केसर से महक जाएंगे...। हरगोबिंद झाब ने ये वक्त भी अजब सौदागर है, फंसा लालच कुछ भी ले जाता है, जवानी लालच दे बचपन छीना, उस पर भी गरूर हमें छाता है।... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। राजकुमार भारद्वाज ने जब बादलों के मन में बात थी कुछ ईमान की, बादलों को फिक्र थी मेरे कच्चे मकान की... पढ़ा तो लोग वाह-वाह करने लगे। इंदिरा खुराना ने मैं सूरज की तरह प्रखर तेज का दंभी तो नहीं, पर अंधेरी कुटिया की दहलीज पर अंधेरे को ललकारता अदना सा दीप हूं... सुनाया। इकबाल पानीपती ने हर एक आंख में शर्म ओ हया नहीं मिलती, हर एक सर पर हया की रिदा नहीं मिलती, नहीं है रोग कोई लाइलाज दुनिया में, बस एक वहम है इसकी दवा नहीं मिलती... सुनाकर काव्य गोष्ठी को नई ऊंचाई दी। सुरेंद्र धीमान ने सुनाया- वह कहते हैं कि तुमने हमें हंसाया बहुत है, मगर हमने इसी बहाने अपने दर्द को छुपाया बहुत है...। इसके अलावा कमलेश पालीवाल, सुभाष भाटिया, सिराज पैकर, निर्मल आर्या, अब्दुल कादिर, सौरभ मासूम, गुलशन सपड़ा, सुलेख जैन आदि ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। मंच संचालन कमलेश पालीवाल ने किया।