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Panipat News: यमुना का जलस्तर बढ़कर 230.20 मीटर पहुंचा, तटबंध को मजबूत करने का कार्य पूरा, जेई व बेलदारों की छुट्टी रद्द

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यमुना में बढ़ रहा जलस्तर। संवाद
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सनौली। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पानीपत जिले में यमुना नदी का जलस्तर उफान पर है। पिछले करीब 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 229.00 मीटर से बढ़कर 230.20 मीटर के आसपास बना हुआ है।
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हथिनीकुंड बैराज से 24 घंटे में अलग-अलग किस्तों में छोड़े गए एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी में अधिकतम 63 हजार क्यूसेक पानी शामिल है। बुधवार दोपहर बाद पानीपत जिले की सीमा में प्रवेश करने से तटीय इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। तटबंध के अंदर आसपास के किसानों की फसलों में पानी भर गया है।
9.60 करोड़ की लागत से बाढ़ बचाव कार्य पूरा
यमुना में जलस्तर बढ़ने के बीच सिंचाई विभाग ने बाढ़ बचाव प्रबंधन के तहत यमुना तटबंध को मजबूत करने का कार्य युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया है। विभाग द्वारा करीब 9.60 करोड़ रुपये की लागत से तामशाबाद, खोजकीपुर, बिलासपुर और गोयला में पत्थरों की नई ठोकरें लगाने, पुरानी ठोकरों की मरम्मत करने और लोहे के तारों के जाल से पत्थरों को बांधकर रिवेटमेंट करने का कार्य मंगलवार को ही संपन्न कर लिया गया। बुधवार को सिंचाई विभाग के एसडीओ सतीश कुमार ने अपनी पूरी टीम के साथ गोयला समेत विभिन्न स्थलों पर इन कार्यों का जायजा लिया।
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मानसून के मद्देनजर 24 घंटे होगी निगरानी
मानसून सीजन की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने सभी जूनियर इंजीनियरों और बेलदारों की छुट्टियां तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी हैं। पानीपत जिले की सीमा में गांव राणा माजरा से लेकर राक्सेड़ा और हल्दाना तक करीब 45 किलोमीटर लंबे यमुना तटबंध को अलग-अलग जोन बनाए हैं। प्रत्येक जोन में पांच-छह जेई और बेलदारों की 24 घंटे निरंतर गश्त व निगरानी की ड्यूटी लगाई गई है। सभी कर्मचारी सीधे एक्सईएन सुरेश सैनी और एसडीओ सतीश कुमार को रिपोर्ट प्रस्तुत देंगे।
तटबंध टूटने से रोकने के लिए चूहों के बिल और पाइपों की जांच
तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में गहन जांच अभियान शुरू कर दिया है। कर्मचारी तटबंध में किसानों द्वारा खेतों में पानी ले जाने के लिए लगाए गए पाइपों और चूहों द्वारा बनाए गए बिलों (खड्डों) को बंद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, जलस्तर बढ़ने पर इन्हीं पाइपों के स्थानों और चूहों के बिलों से पानी रिसने के कारण तटबंध टूटने का खतरा सबसे अधिक रहता है।

बाढ़ बचाव के सभी बचाव कार्य पूरे कर लिए गए हैं। पिछले दो दिनों के मुकाबले जलस्तर में मामूली ठहराव देखा जा रहा है। विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। -सतीश कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग।
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