यमुना के निकटवर्ती पहाड़ी और मैदानी क्षेत्र में अच्छी बारिश होने से यमुना उफान पर है। प्रदेश की तरफ यमुना से सटे करीब 17 गांव हैं, अब तक इनकी करीब 4 हजार एकड़ फसलों में पानी घुुस चुका है। इससे फसलों के खराब होने का डर किसानों को सता रहा है। पानी का जलस्तर चेतावनी संकेत के पास पहुंच चुका है। अगर अब ओर ज्यादा बारिश होती है तो फसलों के अलावा निकटतम गांवों में भी यमुना का पानी घुस जाएगा। वहीं इस स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन के पास भी पर्याप्त साधन नहीं हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि चेतावनी स्तर पार होते ही द्वारा निकटवर्ती गांवों के लिए अलर्ट जारी कर दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार अब तक यमुना में हथनी कुंड बैराज से करीब 2 लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। अगर ओर पानी छोड़ गया तो यहां बाढ़ जैसी स्थिति के हालात हो जाएंगें। गौरतलब है कि हर वर्ष बरसात के समय यमुना में ज्यादा पानी आने की वजह से इसका नुकसान किसानों को ही उठाना पड़ता है। फिलहाल यमुना में पानी का चेतावनी स्तर 230.85 मीटर है। रविवार रात तक पानी 229 मीटर से ऊपर पहुंच चुका था, जबकि सोमवार शाम तक इसमें थोड़ी सी गिरावट भले ही दर्ज की गई हो, लेकिन नदी के उफान ने किसानों को डराया हुआ है। किसान डूबी फसलों को बचाने के लिए प्रयासरत हैं।
न स्टड काम आए न प्रबंध
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने यमुना के पानी को रोकने के लिए पत्थर के स्टड बनाए हैं। इसके अलावा उनके पास पुख्ता प्रबंध भी हैं। उन्होंने तटों पर पत्थर लगवाए हैं, तटों पर भूमि कटाव के बाद मिट्टी डलवाने का काम किया जा रहा है। जबकि धरातल पर इसकी सच्चाई कुछ ओर ही है। उफनते यमुना के पानी को न स्टड रोक पाए और न ही प्रबंध। पानी इनको पार करता हुआ खेतों तक मेेें घुस चुका है।
17 गांवों के खेतों में घुसा पानी
यमुना नदी का पानी साथ लगते राणामाजरा, पत्थर गढ़, नवादा आर, नवादा पार, गढी बेसिक, जलालपुर, तामशाबाद, सनौली खुर्द, रामड़ा आर, नन्हेडा, रिशपुर, अधमी, जलमाणा, गोयला खुर्द, मिर्जापुर, गोयला कलां, खोजकीपुर आदि दर्जनों गांव की हजारों एकड़ फसलों में पानी भर चुका है। इनमें किसानों की ईंख, ज्वार, ढांचा, घीया, पेठा की फसलें खराब हो रही है।
किसानों को फसलों का डर-
किसान कृष्ण, देवेंद्र, बलबीर, पंकज, सुरेश पाल, सतीश ने बताया कि यमुना नदी में आए पानी की वजह से उनकी फसलों खड़ी घीया, पेठा, मिर्च व अन्य सब्जियों में पानी भर गया है। नदी के अंदर खड़ी हजारों एकड़ फसल पानी मेें डूब चुकी हैं। नदी में इसमें फंसे बिजली के ट्यूबवेल की मोटरें, इंजन आदि सामान को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला है। ज्यादा पानी से कटाव व फसलों के बर्बाद होने की आशंका बनी हुई है।
आपदा प्रबंधन के लिए टीम तैयार
दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ आपदा प्रबंधन की एक टीम का गठन किया है। इसमें कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाता है। जिसमें खाद्य एवं आपूर्ति, मेडिकल, अग्निशमन, पीडब्यलूडी के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया जाता है। जो आपातकालीन स्थिति पर अलर्ट जारी होते ही संबंधित जगह पर अपने संसाधनों के साथ पहुंच जाते हैं।
वर्जन-
अभी जलस्तर खतरे से नीचे
एक बार यमुना के पानी का स्तर खतरे के निशान के पास पहुुंच गया था, लेकिन अब जलस्तर नीचे है। अगर और ज्यादा पानी छोड़ा गया तो यह खतरे का निशान के पास पहुंच सकता है।
सुरेश कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।