संवाद न्यूज एजेंसी
सनौली। यमुना का जलस्तर अब चेतावनी बिंदु से भी नीचे चला गया है। लेकिन पानी उतरने के बाद फसलों की बर्बादी का मंजर देखने को मिल रहा है। अब रेत से ढकी जमीन और बर्बाद हो चुकी फसलों के निशान बचे हैं। सब्जी की फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। धान व गन्ने के खेतों में अब भी पानी भरा है।
किसानों का कहना है कि यमुना के पानी से 15 हजार एकड़ से अधिक फसलें प्रभावित हुई हैं। हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी फसलों के प्रभावित होने का सर्वे शुरू नहीं किया गया है। रविवार से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया है। पोर्टल पर किसान आवेदन कर सकते हैं। 10 सितंबर तक आवेदन किया जा सकता है।
पानीपत में यमुना नदी करीब 36 किमी क्षेत्र से निकलती है। यमुना के किनारे 12 से अधिक गांव हैं। एक सप्ताह पहले यमुना में उफान से खेतों में पानी घुस गया था। जिससे मिट्टी का कटाव भी हुआ था। यमुना का जलस्तर अब सामान्य होने लगा है। सनौली के गांव बेचिराग, कमासपुर के रकबे में यमुना का पानी अभी भरा है। तहसील बापौली के यमुना से सटे सनौली ब्लॉक के गांव रामडा-आर, रिशपूर, सनौली गौशाला के पास बांध के अंदर फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। किसानों का अनुमान है कि राणा माजरा, पत्थरगढ, नवादा-पार, नवादा-आर, तामसाबाद, अधमी, जलमाना, मिर्जापूर, यमुना टापू के गांव रहीमपुर खेडी, गोयला कंला, गोयला खुर्द, संजौली, मतनौली, खोजकीपुर, राक्सेड़ा, हथवाला आदि गांवों में 20 हजार बीघा से अधिक खेत डूबे हैं।
यमुना में खतरे के नीचे बह रहा पानी। संवाद